ईडी की कार्रवाई पर आजम खां का सवाल: क्या मुसलमान होने की सजा भुगत रहा हूं?

ईडी की कार्रवाई पर आजम खां का सवाल: क्या मुसलमान होने की सजा भुगत रहा हूं?

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लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां को रामपुर जेल से रिहाई मिलने के तुरंत बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हिरासत में ले लिया। दो पैनकार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद शनिवार शाम आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम जेल से बाहर निकले थे। जैसे ही वे जेल के बाहर आए, ईडी की टीम ने उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया और पूछताछ के लिए गाजियाबाद स्थित ईडी कार्यालय ले गई।

ईडी की सख्त कार्रवाई और समर्थकों का विरोध

ईडी की टीम भारी सुरक्षा बल के साथ रामपुर जेल पहुंची थी, जिसमें चार थानों की पुलिस और करीब 50 सीआरपीएफ जवान शामिल थे। शाम 6:15 बजे वे जेल मुख्य द्वार पर मौजूद थे और सात बजे आजम खां के बाहर निकलते ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया। इस दौरान अधिकारियों और आजम खां के बीच बातचीत भी हुई। जेल के बाहर मौजूद समाजवादी पार्टी के समर्थकों ने ईडी की इस कार्रवाई का विरोध किया और नारेबाजी शुरू कर दी। समर्थकों में नाराजगी साफ देखी गई क्योंकि वे आजम खां की रिहाई का जश्न मनाने आए थे।

अब्दुल्ला आजम को रिहा होने के बाद सीधे अपने घर भेज दिया गया। वह समर्थकों से घिरे नजर आए, जिन्होंने उनका स्वागत किया। रामपुर के एएसपी अनिल सिंह सिसोदिया ने बताया कि आजम खां को हिरासत में लेकर गाजियाबाद मुख्यालय ले जाया गया है, जहां उनसे पूछताछ की जाएगी।

आजम खां की प्रतिक्रिया और सपा अध्यक्ष की आलोचना

जेल से बाहर आने के बाद आजम खां ने मीडिया से कहा कि कानून का अस्तित्व खत्म हो चला है। उन्होंने सवाल किया कि क्या मुसलमान होने की वजह से उन्हें सजा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि उनकी गलती ये है कि एक मुसलमान ने यूनिवर्सिटी और स्कूल बनाए। इस बारे में उन्होंने गहरा दुख जताया।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई को सरकार की साजिश करार दिया। उन्होंने ट्विटर पर कहा कि वर्तमान हुक्मरानों को याद रखना चाहिए कि वक्त के साथ सत्ता भी बदलती है। उन्होंने बताया कि आजम खां के खिलाफ मुकदमों की पूरी दुनिया गंभीरता से देख रही है। उन्होंने आजम खां की उम्र का हवाला देते हुए ऐसे मुकदमों को मंजूरी देना कायरतापूर्ण बताया।

अखिलेश यादव ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई आने वाले समय में सरकार के लिए भी नतीजे लेकर आएगी। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोग जो गलत परंपराएं बढ़ावा दे रहे हैं, उन पर भी वक्त आने पर मुकदमे चलेगा।

क्या है मामला और पिछले फैसले

आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पैनकार्ड मामले में 17 नवंबर को एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सात-सात साल की जेल की सजा सुनाई थी। इसके अलावा दोनों पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। उन्होंने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 29 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने जमानत मंजूर कर ली थी।

रामपुर अदालत की ओर से रिहाई की प्रक्रिया में दो दिन लगे। दोनों पक्ष ने अलग-अलग मामलों में जमानती आवेदन दिए थे, जिनके सत्यापन के बाद रिहाई की अनुमति मिली। आजम खां कुल मिलाकर 11 महीने 14 दिन जेल में रहे।

ईडी की रिपोर्ट और जांच

ईडी ने 13 अक्टूबर को जौहर ट्रस्ट, जौहर यूनिवर्सिटी, आजम खां समेत पांच लोगों के खिलाफ अजीमनगर थाने में एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें विश्वविद्यालय के निर्माण में सरकारी धन के दुरुपयोग और धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। ईडी की यह कार्रवाई आजम खां की रिहाई के तुरंत बाद हुई हिरासत से जुड़ी हुई मानी जा रही है।

समर्थकों की प्रतिक्रिया और भविष्य की स्थिति

रामपुर जेल के बाहर बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता जमा हुए थे। उनकी उम्मीदें आजम खां और अब्दुल्ला आजम की रिहाई के बाद जोरदार स्वागत की थीं। लेकिन ईडी की अचानक हिरासत ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। फिलहाल मामले की तहकीकात गाजियाबाद में जारी है, और इसके अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हैं।

प्रमुख तथ्य

  • आजम खां 11 महीने 14 दिन की कैद के बाद बाहर आए।
  • दो पैनकार्ड मामले में 7 साल की सजा थी।
  • ईडी ने हिरासत के साथ गाजियाबाद में पूछताछ शुरू की।
  • सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार की आलोचना की।

Source

KPN News
Author: KPN News

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