मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप ने किसानों को ₹1.3 लाख करोड़ का मदद पैकेज दिया

मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप ने किसानों को ₹1.3 लाख करोड़ का मदद पैकेज दिया

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अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से दो दिन पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने किसानों को ₹1.3 लाख करोड़ से अधिक की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है। इस पैकेज का मकसद बढ़ती डीजल और खाद की कीमतों से परेशान ग्रामीण इलाकों में किसानों को राहत पहुंचाना है। चुनावी लड़ाई में इस कदम से डोनाल्ड ट्रंप का ग्रामीण समर्थन हासिल करने की कोशिश मानी जा रही है।

किसानों को दी जाने वाली मदद की विस्तार

अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के मुताबिक, इस सहायता पैकेज में डीजल की कीमतों से उत्पन्न कर्ज़ के लिए 8 अरब डॉलर का मदद शामिल है, जो एक बार दिया जाएगा। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किसे कितना मिलेगा और कब मिलेगा। इसके अलावा पशुपालक और मछुआरों को 5 अरब डॉलर से अधिक के कर्ज की गारंटी दी जाएगी।

सरकार जमीन मालिकों और सरकारी सुरक्षा योजनाओं में शामिल किसानों को 1.8 अरब डॉलर की सहायता देगी। खाद बनाने और मीट प्रोसेसिंग के प्रोजेक्ट्स के लिए क्रमशः 573 मिलियन डॉलर और 57 मिलियन डॉलर का फंड निर्धारित किया गया है। खास फसलों के लिए 86.6 मिलियन डॉलर का प्रावधान है।

महंगाई और चुनावी असर

सरकार ने यह भी कहा है कि 472.5 मिलियन डॉलर तक के कृषि उत्पाद सीधे खरीदे जाएंगे और जरूरतमंद संस्थाओं को दिए जाएंगे। खासकर 2025 की फसल के लिए मक्का, सोयाबीन, गेहूं और चावल के किसानों को 13.8 अरब डॉलर अलग से सहायता मिलेगी। यह मदद किसानों को खेती की बढ़ती लागत से निपटने में थोड़ी राहत देने के लिए है।

इस साल खेती महंगी हुई है क्योंकि डीजल, खाद और उपकरणों की कीमतें काफी बढ़ीं। अमेरिकी ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) के अनुसार, डीजल की कीमत पिछले साल की तुलना में 70% ज्यादा होकर 6.32 डॉलर प्रति गैलन हो गई है। इससे किसान अधिक खर्च कर रहे हैं।

कान्सास स्टेट यूनिवर्सिटी के कृषि विशेषज्ञ ग्रेग इबेंडाल कहते हैं कि यह सरकारी सहायता ईंधन की महंगाई में मदद तो करेगी, लेकिन खेती की लागत की समस्या का स्थायी हल नहीं है। ग्रामीण इलाकों में महंगाई और उपचार की सुविधाएं अब बड़े चुनावी मुद्दे बन गई हैं।

विचिटा स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर एलेक्जेंड्रा मिडलवुड का मानना है कि कुछ किसान इस प्रशासनिक मदद से खुश हैं, लेकिन इसे किसी लंबी अवधि की राहत के तौर पर नहीं देखते। साथ ही, इमिग्रेशन नीतियों और खाद्य सहायता कार्यक्रमों में कटौती से भी खेतों में मजदूरों की कमी और मांग घटने की संभावना है।

एम्पोरिया स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर माइकल स्मिथ का कहना है कि बहुत से ग्रामीण मतदाता ट्रंप को पसंद करते हैं, लेकिन उनकी सारी नीतियां उनके मन मुताबिक नहीं हैं। मिडलवुड बताती हैं कि नाराज मतदाता जरूरी नहीं कि डेमोक्रेट्स को वोट दें, कई वोटिंग करने से बच सकते हैं या निर्दलीय उम्मीदवार को समर्थन दे सकते हैं।

ट्रंप का यह किसानों को बड़ा आर्थिक पैकेज मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले उनकी रणनीति का हिस्सा है, लेकिन अभी साफ नहीं है कि इससे चुनाव के परिणाम पर कितना असर होगा।

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KPN News
Author: KPN News

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