देपालपुर सब जेल में सालों से जमा जेलर, मनमानी के खिलाफ सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायतें बेअसर
मुख्य सुर्खी: जेलर की मनमानी से कैदी परेशान, खराब खाना और दुर्व्यवहार की शिकायतें
देपालपुर
शहर के नजदीक स्थित देपालपुर सब जेल में एक जेलर के वर्षों से जमे होने और मनमानी करने का मामला सामने आया है। जेलर के रवैये से कैदी परेशान हैं और उनके खिलाफ कई बार सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
कैदियों को नहीं मिलता मेनू के हिसाब से खाना
जेल के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कैदियों को मेनू (Menu) के हिसाब से खाना नहीं दिया जा रहा है। आरोप है कि कैदियों को हर बार एक ही तरह की दाल और सब्जी परोसी जाती है। इसके अलावा, कैदियों ने खराब पानी मिलने की भी शिकायत की है। बताया गया है कि टॉयलेट में शुरुआत में आने वाला पानी गंदा होता है।
सीएम हेल्पलाइन की शिकायतें भी रफा-दफा
कैदियों से दुर्व्यवहार, खराब खाना और पानी की समस्याओं को लेकर कई बार सीएम हेल्पलाइन पर शिकायतें दर्ज की गईं। लेकिन आरोप है कि जेलर हर बार किसी न किसी माध्यम से दबाव बनाकर इन शिकायतों को रफा-दफा करवा देता है और शिकायतें बंद हो जाती हैं।
परिजनों से मिलावट के लिए पैसे ऐंठने का आरोप
कई कैदियों के परिजनों ने दबी जुबान में यह भी आरोप लगाया है कि उनसे अपने परिजनों से मिलने के बदले पैसे ऐंठे जाते हैं। इसके लिए जेल के बाहर बनी दुकानों पर पैसे रखवाने की बात भी सामने आई है। इस तरह की कई शिकायतें दर्ज होने के बावजूद जेलर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
राजनीतिक रसूख और भ्रष्टाचार के आरोप
खबर के मुताबिक, सबसे बड़ी बात यह है कि यह जेलर वर्षों से देपालपुर सब जेल में जमे हुए हैं। पहले भी इनके खिलाफ शिकायतें हुई हैं, लेकिन सत्ताधारी नेताओं से तार जुड़े होने के कारण आज तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय सूत्रों ने यह भी बताया है कि जेलर हफ्ते में एक ही दिन सब्जी की खरीदी करते हैं और कथित तौर पर फर्जी बिल लगाकर भ्रष्टाचार किया जाता है। यह भी जानकारी सामने आई है कि देपालपुर में रहते हुए जेलर ने खूब संपत्ति बना ली है, जिसको लेकर स्थानीय संगठन के कार्यकर्ता लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं।
लगातार शिकायतें मिलने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कार्रवाई न किए जाने से पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना यह होगा कि जेल में हो रही इस मनमानी के खिलाफ वरिष्ठ अधिकारी कोई कदम उठाते हैं या जेलर पहले की तरह ही शासन-प्रशासन को ठेंगा दिखाते रहेंगे।










