खबर पर नजर की विशेष नजर
लिट चौक: गांधी हॉल में गूंजी ‘परंपरा और आज की आवाज़’; आदित्य गढ़वी और आलोक बाजपेयी की जोरदार जुगलबंदी से श्रोता मंत्रमुग्ध
इंदौर, 19 दिसंबर:
शहर का ऐतिहासिक गांधी हॉल परिसर शुक्रवार की शाम साहित्य, संगीत और गहन विमर्श के एक अद्भुत संगम का साक्षी बना। ‘लिट-चौक’ (सीजन 5) के बहुप्रतीक्षित सत्र ‘परंपरा की गूंज, आज की आवाज़’ का आयोजन अपार सफलता के साथ संपन्न हुआ। खचाखच भरे हॉल में प्रख्यात लोकगायक आदित्य गढ़वी और सुप्रसिद्ध चिंतक व वक्ता आलोक बाजपेयी की मौजूदगी ने एक अविस्मरणीय समां बांध दिया।
जादुई आवाज़ का सम्मोहन
कार्यक्रम में जैसे ही ‘खलासी’ फेम आदित्य गढ़वी ने माइक संभाला, दर्शकों का उत्साह देखते ही बन रहा था। आदित्य ने अपनी मखमली और ओजस्वी आवाज़ में जब लोक नगमों और पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति दी, तो पूरा गांधी हॉल मंत्रमुग्ध हो गया। उनकी गायकी में वह जादू था कि हर कोई सुरों के सम्मोहन में बंधा नजर आया।
विचारों और सुरों की जोरदार जुगलबंदी
शाम का चरम बिंदु वह रहा जब मंच पर सुर और संवाद का अनूठा मिलन हुआ। एक तरफ आदित्य गढ़वी की पारंपरिक गायकी थी, तो दूसरी तरफ आलोक बाजपेयी के आधुनिक संदर्भों से जुड़े गहन विचार। इन दोनों दिग्गजों के बीच हुई ‘जोरदार जुगलबंदी’ ने कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।
‘परंपरा कैसे आज की आवाज़ बन सकती है’, इस विषय पर हुई उनकी संगीतमय और वैचारिक बातचीत ने दर्शकों को गहराई से सोचने पर मजबूर किया और साथ ही झूमने का मौका भी दिया। दोनों कलाकारों का तालमेल और ऊर्जा देखने लायक थी।
देर तक गूंजी तालियां
यह आयोजन साबित कर गया कि जब परंपरा की गहराई को आज की समझ के साथ पेश किया जाता है, तो परिणाम कितना जादुई होता है। कार्यक्रम के अंत में गांधी हॉल परिसर देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। इंदौरवासियों के लिए यह एक यादगार सांस्कृतिक शाम रही।










