केसरबाग ब्रिज प्रोजेक्ट पर मंडराया संकट: ठेकेदार कंपनी ने दी इंदौर छोड़ने की चेतावनी, सरकारी लेतलाली से जनता बेहाल
इंदौर | खबर पर नजर (KPN News) संवाददाता: शैलेंद्र श्रीमाल
इंदौर। शहर के पश्चिमी क्षेत्र की जीवनरेखा माने जाने वाले केसरबाग रोड रेलवे क्रॉसिंग ब्रिज का भविष्य अब अधर में लटकता नजर आ रहा है। एक तरफ जहाँ जनता घंटों लगने वाले जाम और धूल से त्रस्त होकर आंसू बहा रही है, वहीं दूसरी ओर निर्माण कार्य शुरू न होने से नाराज गुजरात की ठेकेदार कंपनी ने रेलवे को अल्टीमेटम दे दिया है कि यदि सात दिनों में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर इंदौर से लौट जाएंगे।
ठेकेदार का अल्टीमेटम: “सात दिन में फैसला करें वरना लौट जाएंगे”
केसरबाग फाटक पर करीब 35 करोड़ रुपये की लागत से 750 मीटर लंबा टू-लेन ब्रिज बनना प्रस्तावित है। गुजरात की जिस कंपनी को इसका ठेका मिला है, वह सितंबर 2025 से इंदौर में डेरा डाले हुए है। कंपनी का कहना है कि पिछले चार महीनों से उनका स्टाफ और मशीनें खाली बैठे हैं क्योंकि साइट क्लियर करके नहीं दी गई है। ड्राइंग फाइनल न होने और पाइप लाइन शिफ्टिंग के विवाद के चलते ठेकेदार ने साफ कह दिया है कि वे स्टाफ के वेतन का बोझ और ज्यादा नहीं उठा सकते।
रेलवे और नगर निगम की आपसी खींचतान में फंसी जनता
इस पूरे प्रोजेक्ट के अटकने का मुख्य कारण रेलवे और नगर निगम के बीच समन्वय की कमी है। पाइप लाइन शिफ्टिंग के खर्च को लेकर दोनों विभागों में ‘ले-दे’ मची हुई है। नगर निगम जितनी राशि मांग रहा है, रेलवे उसे ‘उचित’ नहीं मान रहा। सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे पर 9 बार पत्राचार हो चुका है और एक बैठक भी विफल रही है। जब तक पानी और सीवरेज की लाइनें नहीं हटतीं, तब तक ब्रिज का निर्माण शुरू होना असंभव है।
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
क्षेत्र की जनता का आरोप है कि इंदौर के अन्य हिस्सों में विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं, लेकिन केसरबाग क्षेत्र के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। वार्ड 72 के पार्षद योगेश गेंदर इस कार्य के लिए प्रयासरत जरूर हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं दिख रहा। स्थानीय निवासियों, उद्योगपतियों और विद्यार्थियों का कहना है कि यदि कोई गंभीर मरीज जाम में फंस जाए तो उसकी जान पर बन आती है। जनता अब सीधे मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग कर रही है ताकि ‘धीमी राजनीति’ के कारण शहर का आखिरी रेलवे फाटक बंद होने का सपना अधूरा न रह जाए।
मुख्य बिंदु एक नजर में:
* प्रोजेक्ट लागत: 35 करोड़ रुपये।
* ब्रिज की लंबाई: 750 मीटर (टू-लेन)।
* मुख्य बाधा: पाइप लाइन शिफ्टिंग और ड्राइंग का फाइनल न होना।
* वर्तमान स्थिति: ठेकेदार कंपनी ने काम बंद कर लौटने की लिखित चेतावनी दी है।










