चिंताजनक: ऑनलाइन बुलिंग और गलत कंटेंट के जाल में बच्चे, 50% माता-पिता परेशान
नई दिल्ली/इंदौर। देश में 9 से 17 साल के बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। ‘लोकलसर्किल्स’ द्वारा हाल ही में किए गए एक व्यापक सर्वे में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि देश के लगभग 50 प्रतिशत माता-पिता के अनुसार उनके बच्चे ऑनलाइन बुलिंग या उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं। यह सर्वे देश के 302 जिलों के 89 हजार से अधिक शहरी माता-पिता की राय पर आधारित है।
डीपफेक और ट्रोलिंग का बढ़ा खतरा
सर्वे के अनुसार, करीब 46 प्रतिशत पेरेंट्स ने माना कि पिछले एक साल में उनके बच्चों को ऑनलाइन ट्रोलिंग या डीपफेक जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा, 54 प्रतिशत बच्चों को इंटरनेट पर काम करते समय अनचाहे रूप से गलत या एडल्ट कंटेंट देखने को मिला। सर्वे यह भी बताता है कि 39 प्रतिशत बच्चों को आपत्तिजनक मैसेज मिले हैं, जबकि 33 प्रतिशत बच्चों को ऑनलाइन धमकियों का सामना करना पड़ा है।
सोशल मीडिया बना सबसे बड़ा खतरा
अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को लेकर है। लगभग 75 प्रतिशत माता-पिता का मानना है कि सोशल मीडिया पर बच्चों के शोषण की आशंका सबसे अधिक रहती है। वहीं, 52 प्रतिशत पेरेंट्स ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स और 46 प्रतिशत ओटीटी व वीडियो प्लेटफॉर्म्स को बच्चों के लिए असुरक्षित मानते हैं। केवल 4 प्रतिशत अभिभावक ही ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म्स को पूरी तरह सुरक्षित मानते हैं।
जटिल है शिकायत प्रक्रिया www.hearingcareaid.in
बच्चों के साथ होने वाले इस डिजिटल अपराध के बावजूद, शिकायतों का आंकड़ा बेहद कम है। सर्वे में शामिल 82 प्रतिशत माता-पिता ने कहा कि बच्चों से संबंधित ऑनलाइन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराना एक अत्यंत कठिन प्रक्रिया है। 29 प्रतिशत अभिभावकों के अनुसार, शिकायत की प्रक्रिया इतनी जटिल और समय लेने वाली है कि वे चाहकर भी इसे शुरू नहीं कर पाते। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऑनलाइन सक्रियता बढ़ने से बच्चों में नींद की कमी, गुस्सा और एकाग्रता में कमी जैसी मानसिक समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
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खबर पर नजर पत्रकार शैलेंद्र श्रीमाल









