अखंड सौभाग्य और आस्था का पर्व ‘गणगौर’: घर-घर गूँजे ईसर-गौरा के लोकगीत

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अखंड सौभाग्य और आस्था का पर्व ‘गणगौर’: घर-घर गूँजे ईसर-गौरा के लोकगीत
इंदौर/ब्यूरो: चैत्र मास की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला लोक आस्था का महापर्व गणगौर आज पूरे उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। विशेष रूप से निमाड़ और मालवा अंचल में इस त्योहार की छटा देखते ही बन रही है। अखंड सौभाग्य की कामना के साथ सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं ने ईसर जी (भगवान शिव) और गौरा माता (माता पार्वती) का विधि-विधान से पूजन किया।
परंपरा और रीति-रिवाज
पिछले 16 दिनों से चल रहे इस कठिन अनुष्ठान का आज मुख्य दिन है। महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर सुबह से ही उद्यानों और सरोवरों से मिट्टी लाकर प्रतीकात्मक मूर्तियाँ बनाईं और उन्हें फल-फूल, चूरमे का भोग लगाकर पूजा अर्चना की। मान्यता है कि माता पार्वती ने भी इसी दिन भगवान शिव को पाने के लिए व्रत किया था, इसीलिए महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं।
लोकगीतों की मधुर गूँज
“खेलां दो गणगौर भंवर म्हाने खेलण दो…” जैसे पारंपरिक लोकगीतों से गलियाँ और मोहल्ले गूँज उठे। पूजन के पश्चात दोपहर में सामूहिक रूप से गणगौर की सवारी निकाली गई, जहाँ माता गौरा को विदाई (सीरावने) दी गई। भक्तों का उत्साह ऐसा था कि मानों साक्षात शिव-पार्वती धरती पर पधारे हों।
प्रस्तुति: शैलेन्द्र श्रीमाल, पत्रकार खबर पर नजर परिवार वेबसाइट: www.KPNindia.in
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