## *अस्पतालों में ‘दवाइयों का खेल’: सेवा नहीं, ‘लूट का सेंटर’ बनते जा रहे अस्पताल!*
*इंदौर के प्रमिला अस्पताल में सामने आया मानवता को शर्मसार करने वाला मामला; जेनेरिक दवाएं देकर वसूले जा रहे एथिकल (ब्रांडेड) दवाओं के दाम। मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर बनाया जा रहा है मोटा मुनाफा।*
### *मरीजों की जेब पर डाका, सिस्टम मौन*
इंदौर के प्रमिला अस्पताल से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन और मेडिकल स्टोर की मिलीभगत से मरीजों को *सस्ती जेनेरिक दवाएं* दी जा रही हैं, लेकिन उनका बिल *महंगी ब्रांडेड (एथिकल) दवाओं* के नाम पर फाड़ा जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, ₹200 का इंजेक्शन मरीजों को ₹1200 में बेचा जा रहा है।
### *अव्यवस्थाओं का अंबार: न डॉक्टर जवाबदेह, न फार्मासिस्ट मौजूद*
जांच में कई चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आई हैं:
* *पंजीकृत फार्मासिस्ट नदारद:* दस्तावेजों में दर्ज फार्मासिस्ट (मोहम्मद अनस अंसारी) की अनुपस्थिति में अनट्रेंड स्टाफ मेडिकल स्टोर चला रहा है।
* *नियमों की धज्जियां:* अस्पताल की नई बिल्डिंग के निर्माण में भी सुरक्षा नियमों को ताक पर रखने के आरोप हैं, जिससे आसपास के परिवारों की जान जोखिम में है।
* *प्रशासनिक लापरवाही:* बार-बार शिकायतों के बावजूद सीएमएचओ (CMHO) और स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी मिलीभगत की ओर इशारा करती है।
### *महापौर के परिवार के साथ भी यही हाल*
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब पता चला कि पीड़ित परिवार शहर के प्रथम नागरिक (महापौर) से जुड़ा है। जब रसूखदार परिवारों के साथ अस्पताल ऐसा व्यवहार कर रहे हैं, तो आम जनता की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। क्षेत्रीय पार्षद और जनप्रतिनिधियों ने इस पर कड़ा आक्रोश जताते हुए कलेक्टर से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
### *जेनेरिक और एथिकल का अंतर समझना जरूरी*
विशेषज्ञों के अनुसार, जेनेरिक दवाएं 30% से 80% तक सस्ती होती हैं, जबकि उनकी गुणवत्ता ब्रांडेड दवाओं के समान ही होती है। अस्पताल इसी अंतर का लाभ उठाकर मरीजों को धोखे में रख रहे हैं और अवैध कमाई कर रहे हैं।
*खबर पर नजर की अपील:* इलाज के दौरान दवाओं के बिल और पैकेट की जांच जरूर करें। यदि अस्पताल प्रबंधन सहयोग न करे, तो तुरंत संबंधित अधिकारियों से शिकायत करें।
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