*कानपुर बना ‘मिनी जामताड़ा’: जंगल में झोपड़ियां बनाकर चल रहा था साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क*

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### *कानपुर बना ‘मिनी जामताड़ा’: जंगल में झोपड़ियां बनाकर चल रहा था साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क*
*कानपुर।* झारखंड का जामताड़ा अपनी साइबर ठगी के लिए देश भर में कुख्यात है, लेकिन अब उत्तर प्रदेश के कानपुर में भी वैसा ही एक बड़ा नेटवर्क सामने आया है। कानपुर के पास स्थित 7 गांवों—रठीगांव, लक्ष्मणपुर, समाज नगर, लीलादास का पुरवा, बढ़ैल, पुलंदर और कैलाशपुर—को अब ‘मिनी जामताड़ा’ कहा जा रहा है। पुलिस की हालिया छापेमारी के बाद इन गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है।
### *जंगल के बीच बना था हाई-टेक ‘वर्कप्लेस’*
पुलिस के अनुसार, साइबर ठगों ने अपना ठिकाना घने जंगल के बीच बनाया हुआ था। वहां तीन झोपड़ियां बनाई गई थीं, जहां खाना बनाने से लेकर रहने तक का पूरा इंतजाम था। छापेमारी के दौरान वहां से सैकड़ों डिस्पोजल प्लेट्स मिली हैं, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यहां रोजाना 50 से ज्यादा युवक इकट्ठा होकर ठगी के धंधे को अंजाम देते थे। पुलिस की आहट मिलते ही ये लोग गांव के रास्तों से फरार हो जाते थे।
### *कैसे देते थे ठगी को अंजाम?*
यह गिरोह पिछले पांच वर्षों से सक्रिय था। इनके काम करने का तरीका बेहद शातिर था:
* *फर्जी दस्तावेज:* ठग फर्जी आईडी के जरिए सिम कार्ड और बैंक खाते खुलवाते थे।
* *झांसा देना:* लोगों को कॉल कर सरकारी योजनाओं, बैंक लोन या पुलिस अधिकारी बनकर डराते और ठगते थे।
* *टीम वर्क:* एक कॉलर शिकार को फंसाता था, फिर दूसरा सदस्य ‘वरिष्ठ अधिकारी’ बनकर बात संभालता था।
* *आंकड़े:* हर ठग रोजाना 50-60 कॉल करता था और औसतन 5-6 लोगों को अपने जाल में फंसा लेता था। गैंग रोजाना लाखों रुपये की ठगी करता था।
### *शहरों में नौकरी और छुट्टी में ठगी*
जांच में यह भी सामने आया है कि इस गैंग के अधिकांश सदस्य दूसरे राज्यों या शहरों में नौकरी करते हैं। जब वे छुट्टी पर गांव आते थे, तो इस काले धंधे में शामिल हो जाते थे। जैसे ही पुलिस की हलचल बढ़ती या बड़ी रकम हाथ लगती, वे वापस अपनी मिल या फैक्ट्री की नौकरियों पर लौट जाते थे।
### *7 गांवों से 80% युवा लापता*
कानपुर पुलिस ने 3 महीने की गुप्त फील्ड एक्सरसाइज के बाद फिल्मी स्टाइल में 17 गाड़ियों के साथ दबिश दी और करीब 20 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई के बाद से इन 7 गांवों के लगभग 80% युवा गायब हैं। 1700 से 2000 की आबादी वाले इन गांवों में अब केवल सन्नाटा है, घरों के दरवाजे बंद हैं और लोग डरे हुए हैं।
*रिपोर्ट:* शैलेंद्र श्रीमाल, खुशी श्रीमाल
*साभार:* खबर पर नजर परिवार (KPN News)
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Author: KPN News

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