मंगाव: एक अनोखा महाराष्ट्र गांव, जहां परित्यक्त महिलाएं और उनके बच्चे पाते हैं नया जीवन

Inside Mangav, a unique Maharashtra village for abandoned women and their children

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

मंगाव में नया जीवन: परित्यक्त महिलाओं और बच्चों के लिए एक आशियाना

स्थान: मंगाव, महाराष्ट्र – (रिपोर्टर)

खबर का सार
महाराष्ट्र के मंगाव गांव में एक अनूठा प्रयास महिलाओं और बच्चों के पुनर्वास के लिए चल रहा है। इस गांव में कुल 477 बचाई गई महिलाएं और 43 बच्चे रहते हैं। यहां के निवासी एक साथ मिलकर बेकरी चलाते हैं, फार्म और डेयरी यूनिट्स का प्रबंधन करते हैं, साथ ही जल्द ही यहां हाईवे कैफे भी शुरू किया जाएगा। यह पहल डॉ. राजेंद्र और डॉ. सुचेता धमणे द्वारा स्थापित की गई है, जो सामाजिक परिवर्तन और पुनर्वास की मिसाल बन रही है।

घटना का विस्तार
मंगाव गांव को खासतौर पर उन महिलाओं के लिए बनाया गया है जिन्हें सामाजिक भेदभाव, घरेलू हिंसा या अन्य कारणों से अपने घरों से निकाला गया। यह गांव न केवल एक आश्रय स्थल है, बल्कि यहां के निवासियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी कार्यरत है। महिलाएं बेकरी में काम सीखती हैं, जहां वे अपने उत्पाद बेचकर आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं। साथ ही स्थानीय खेती और डेयरी यूनिट्स में भी उनकी भागीदारी से गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। इनमें से कई महिलाओं ने अपने हुनर का उपयोग कर सफलतापूर्वक व्यवसाय शुरू किए हैं। डॉ. राजेंद्र और डॉ. सुचेता धमणे ने इस परियोजना का लक्ष्य न केवल पुनर्वास, बल्कि समाज में स्वीकार्यता को बढ़ावा देना बताया है।

प्रतिक्रिया और बयान
डॉ. सुचेता धमणे ने कहा, “हमारा मकसद तबाह हुई जिंदगी को नई दिशा देना है। जब एक महिला आत्मनिर्भर बनती है तो उसका परिवार और समाज भी मजबूत होता है।” वहीं गांव की एक निवासी महिला, कविता ताम्हणकर ने बताया, “यहां आकर मुझे उम्मीद की नई किरण मिली है। अब मैं अपनी बच्ची के लिए बेहतर भविष्य सोच सकती हूं।” स्थानीय प्रशासन भी इस पहल की सराहना कर रहा है और इसे अन्य जगहों पर भी लागू करने की योजना बना रहा है।

अतिरिक्त जानकारी
मंगाव गांव जल्द ही एक हाईवे कैफे लॉन्च करने जा रहा है, जो स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित करेगा और यात्रियों को ताजा भोजन उपलब्ध कराएगा। यह पहल न केवल गांव के निवासियों के लिए रोजगार का स्रोत होगी, बल्कि सामाजिक बदलाव का प्रतीक भी बनेगी। आज मंगाव केवल एक पुनर्वास केंद्र नहीं, बल्कि महिलाओं और बच्चों के लिए आशा और नयी जिंदगी का प्रतीक बन गया है। यह मॉडल पूरे महाराष्ट्र के लिए एक प्रेरणा बन सकता है।

​🚩 सादर जय जिनेंद्र 🚩
​📢 खबर पर नजर (Khabar Par Nazar) न्यूज़ नेटवर्क 📰
🚀 अब आपकी हर खबर पहुंचेगी लाखों लोगों तक!
​🗞️ दैनिक पेपर: दैनिक अभियान आज तक (6 राज्यों में प्रसारित)
🗞️ साप्ताहिक पेपर: जन स्वामी
​🎤 संवाददाता: खुशी श्रीमाल
🛡️ मार्गदर्शक: शैलेंद्र श्रीमाल
(जिला अध्यक्ष – जैन पत्रकार परिषद, इंदौर)
​🌐 वेबसाइट: www.kpnindia.in
​📢 विशेष विज्ञापन: खुशी टेक्नोलॉजी (Khushi Technologies) 📢
🦻 कम सुनना अब कोई समस्या नहीं! आधुनिक तकनीक और स्पष्ट आवाज़ के लिए आज ही अपनाएँ हमारी डिजिटल कान की मशीन।
​🌐 वेबसाइट: www.hearingcareaid.in
📞 संपर्क: 9300041604

Source

KPN News
Author: KPN News

और पढ़ें