छह साल बाद भी NEP के तहत लचीले विषय विकल्प का सपना अधूरा
नई दिल्ली – (रिपोर्टर)
समाचार का सारं
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू होने के छह वर्ष बाद भी स्कूल स्तर पर छात्रों के लिए लचीले और विविध विषय विकल्प उपलब्ध कराने का लक्ष्य अभी अधूरा ही दिख रहा है। नीति में छात्रों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता देने पर जोर था, लेकिन स्कूलों में इसकी पूर्णतः व्यावहारिकता आज तक नहीं बन पाई है। लगभग सभी राज्य और केंद्रीय बोर्ड अब भी परंपरागत विषयों और कड़े पाठ्यक्रम को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे छात्र अपनी पसंद के अनुसार विषय न चुन सकें।
घटना का विस्तार
2017 में पेश की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने स्कूली शिक्षा को अधिक लचीला और छात्र-केंद्रित बनाने की कवायद की। नीति का उद्देश्य छात्रों को विज्ञान, कला, वाणिज्य, भाषाओं, और तकनीकी विषयों के विविध संयोजन में से चुनने की स्वतंत्रता देना था, जिससे उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार उनके भविष्य के रास्ते खुलें। हालांकि बीते वर्षों में कई राज्यों ने कुछ सुधार किए, लेकिन शिक्षा संस्थान अभी भी पाठ्यक्रम और विषय चयन में कठोर बाधाओं के साथ खड़े हैं। मुख्य कारणों में संसाधनों की कमी, शिक्षक प्रशिक्षण की कमी, और पारंपरिक शिक्षा ढांचे के प्रति जड़ता को माना जा रहा है।
प्रतिक्रिया और बयान
शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। डॉ. रवीना शर्मा, शिक्षा नीति विश्लेषक, कहती हैं, “NEP के उद्देश्य बहुत अच्छे हैं, लेकिन कार्यान्वयन बेहद धीमा है। स्कूल आज भी विषय चुनने में छात्रों को पूरी स्वतंत्रता नहीं दे पा रहे, जो नीति की मूल भावना के विरोध में है।” एक अभिभावक, श्रीमती अंजलि मिश्रा ने बताया, “मेरे बच्चे का मन संगीत और कला में ज्यादा है, लेकिन स्कूल में उपलब्ध विषय सीमित होने के कारण वह उन विषयों को नहीं चुन पा रहा। यह बहुत निराशाजनक है।”
अतिरिक्त जानकारी और प्रभाव
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस समस्या का समाधान करने के लिए शिक्षक प्रशिक्षण में सुधार, विषयों की विविधता में वृद्धि और स्कूल स्तर पर पर्याप्त संसाधनों का आवंटन बेहद आवश्यक है। साथ ही, राज्य और केंद्रीय स्तर पर शिक्षा विभागों को अधिक सक्रिय और पारदर्शी नीतियां बनानी होंगी ताकि छात्र आधार पर उनके विकल्प सुनिश्चित हो सकें। यदि विषय चयन की स्वतंत्रता व्यापक रूप से लागू हो जाए, तो यह न केवल छात्रों के शैक्षिक अनुभव को समृद्ध करेगा, बल्कि उनकी रचनात्मकता और कैरियर विकल्पों को भी बढ़ाएगा। फिलहाल यह एक लंबा रास्ता है, लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सिद्धांतों को सफल बनाने के लिए यह आवश्यक कदम माना जा रहा है।
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