शास्त्रीय नृत्य गुरु गिरिजा चंद्रन से बातचीत, जिन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया

In conversation with classical dance guru Girija Chandran who won the Sangeeth Natak Akademi Award

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गिरिजा चंद्रन का शास्त्रीय नृत्य के क्षेत्र में योगदान

तिरुवनंतपुरम – (रिपोर्टर)

75 वर्षीय नृत्य शिक्षक गिरिजा चंद्रन, जो तिरुवनंतपुरम में स्थित रिगाटा नाट्य संगीत केंद्र संचालित करती हैं, को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया है। मोहिनियट्टम के क्षेत्र में उनके 53 वर्षों के समर्पित योगदान को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के माध्यम से मान्यता मिली है। हालांकि उन्होंने कभी मंच पर प्रस्तुति नहीं दी, फिर भी गिरिजा चंद्रन ने लगभग एक लाख छात्रों को प्रशिक्षित किया है, जिससे उनकी योग्यता और समर्पण का अंदाजा लगाया जा सकता है।

पारंपरिक संस्कृति के दायरे में गिरिजा चंद्रन

गिरिजा चंद्रन की शिक्षा और प्रशिक्षण पद्धति ने मोहिनियट्टम नृत्य के पारंपरिक स्वरूप को बचाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिछले पांच दशकों में, उन्होंने हजारों छात्रों को इस नृत्य शैली की बारीकियों से अवगत कराया है। उनकी संस्था रिगाटा नाट्य संगीत केंद्र शास्त्रीय नृत्य के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए एक केंद्र के रूप में काम करती है। यहां प्रशिक्षित छात्रों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर कला की विशिष्टता प्रदर्शित की है।

गिरिजा चंद्रन के विचार और प्रतिक्रिया

पुरस्कार मिलने पर गिरिजा चंद्रन ने कहा, “यह सम्मान मेरे लिए अत्यंत गर्व का विषय है। मोहिनियट्टम नृत्य को संजोकर रखना और इसे आगे बढ़ाना मेरी प्राथमिकता है। मैं अपने सभी छात्रों को धन्यवाद देना चाहती हूं जिन्होंने मेरे साथ इस कला को जीवित रखा।” उन्होंने संगीत नाटक अकादमी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के पुरस्कार युवा कलाकारों और शिक्षकों दोनों के लिए प्रोत्साहन का काम करते हैं।

नृत्य परंपरा का संरक्षण और प्रभाव

मोहनियट्टम कोकेरल की एक समृद्ध पारंपरिक नृत्य शैली है, जिसे गिरिजा चंद्रन जैसे गुरुओं ने जीवन्त रखा है। उनका काम न केवल कला के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए भी आवश्यक है। ऐसे कलाकार और शिक्षक हमारी सांस्कृतिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम हैं। गिरिजा चंद्रन का यह पुरस्कार उनके अद्वितीय योगदान का जश्न है, जो कला की भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनता है।

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Author: KPN News

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