नई दिल्ली, दिल्ली। केसर का नाम आते ही इसकी महंगी कीमत का ख्याल आ जाता है। भारतीय व्यंजनों, मिठाइयों और पारंपरिक पेय में इस्तेमाल होने वाला यह मसाला अपनी खुशबू और रंग के लिए जाना जाता है। हालांकि, केसर को घर में उगाना पूरी तरह आसान नहीं है, क्योंकि इसे विशेष जलवायु और देखभाल की जरूरत होती है। फिर भी सही परिस्थितियां उपलब्ध होने पर इसे गमले में उगाने का प्रयास किया जा सकता है।
केसर क्रोकस सैटिवस नामक पौधे के फूल से प्राप्त होता है। इसके बैंगनी रंग के फूल के बीच लाल रंग के तीन नाजुक रेशे निकलते हैं। इन्हीं रेशों को सुखाकर केसर तैयार किया जाता है। भारत में इसकी खेती ठंडे इलाकों में बेहतर होती है, इसलिए घर पर रोपाई करने से पहले स्थानीय मौसम का ध्यान रखना जरूरी है।
गमले का चुनाव भी है जरूरी
केसर लगाने के लिए ऐसा गमला चुनें जिसमें पानी निकासी की अच्छी व्यवस्था हो। गमला पर्याप्त गहरा होना चाहिए ताकि कंद की जड़ों को फैलने की जगह मिल सके। गमले के नीचे ड्रेनेज होल नहीं होने पर पानी जमा हो सकता है और कंद खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
मिट्टी तैयार करने का सही तरीका
केसर के लिए हल्की और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी बेहतर मानी जाती है। सामान्य बगीचे की मिट्टी में मोटी रेत और अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद मिलाई जा सकती है। मिट्टी बहुत ज्यादा चिपचिपी नहीं होनी चाहिए। रोपाई से पहले मिट्टी को भुरभुरा कर लेना बेहतर रहता है।
कंद की रोपाई कैसे करें?
केसर उगाने के लिए स्वस्थ कॉर्म या कंद की जरूरत होती है। कंद पर सड़न या फफूंद के निशान नहीं होने चाहिए। इन्हें लगभग 8 से 10 सेंटीमीटर की गहराई में लगाया जा सकता है। कंद का नुकीला भाग ऊपर की ओर रखें।
एक ही गमले में कई कंद लगाते समय उनके बीच पर्याप्त दूरी जरूर रखें। इससे पौधों को हवा और जगह मिलती है।
पानी देने में न करें गलती
रोपाई के बाद हल्का पानी देना पर्याप्त है। इसके बाद मिट्टी की स्थिति देखकर ही पानी दें। लगातार गीली मिट्टी कंद के लिए नुकसानदायक हो सकती है। खासतौर पर पानी का जमाव सड़न की समस्या पैदा कर सकता है।
फूल आने पर क्या करें?
अनुकूल परिस्थितियों में पौधे पर फूल आने पर उसके अंदर मौजूद लाल रेशों को सावधानी से अलग किया जा सकता है। इन्हें सही तरीके से सुखाने के बाद सीमित मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू गमले में उगाए गए पौधों से बड़ी मात्रा में उत्पादन की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। केसर की सफल खेती जलवायु, कंद की गुणवत्ता और देखभाल पर निर्भर करती है।









