नई दिल्ली, भारत
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश के 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (डीपीएसयू) के वार्षिक प्रदर्शन और प्रगति की व्यापक समीक्षा की है। समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने सभी डीपीएसयू को अगले पांच वर्षों के लिए एक स्पष्ट और व्यावहारिक रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया। इस रोडमैप का उद्देश्य उभरती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप देश की रक्षा तैयारियों को और मजबूत करना है।
रक्षा पीएसयू भवन में आयोजित बैठक में 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र कंपनियों की उपलब्धियों और प्रदर्शन का आकलन किया गया। इस दौरान रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने, स्वदेशी तकनीक विकसित करने, अनुसंधान एवं विकास को मजबूत करने और रक्षा निर्यात में वृद्धि जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, राजनाथ सिंह ने बैठक में डीपीएसयू के प्रदर्शन की समीक्षा के साथ भारत के रिकॉर्ड रक्षा उत्पादन में उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां देश के रक्षा निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
रक्षा मंत्री ने डीपीएसयू से कहा कि वे अपनी उत्पादन क्षमता को लगातार मजबूत करें। इसके साथ ही तकनीकी दक्षता और अनुसंधान क्षमता में भी सुधार किया जाए। उन्होंने भारतीय सशस्त्र बलों की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्वदेशी समाधानों के विकास पर विशेष जोर दिया।
बदलती सुरक्षा परिस्थितियों में आधुनिक तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में रक्षा कंपनियों को नई तकनीकों और नवाचार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। बैठक में डीपीएसयू को अनुसंधान एवं विकास के प्रयासों को तेज करने के लिए भी कहा गया, ताकि देश की रक्षा जरूरतों के लिए अधिक से अधिक स्वदेशी तकनीक और उपकरण विकसित किए जा सकें।
रक्षा मंत्री ने रक्षा निर्यात को बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। घरेलू रक्षा उत्पादन में वृद्धि के साथ भारतीय रक्षा उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तलाशने की दिशा में काम करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इससे भारत के रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि डीपीएसयू को केवल मौजूदा उत्पादन लक्ष्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें भविष्य की सुरक्षा जरूरतों, तकनीकी बदलावों और सशस्त्र बलों की मांग को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक योजना तैयार करनी होगी।
अगले पांच वर्षों का रोडमैप डीपीएसयू की रणनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने, तकनीकी विकास को गति देने, अनुसंधान एवं विकास को मजबूत करने और रक्षा निर्यात के नए अवसर तलाशने के लिए स्पष्ट प्राथमिकताएं निर्धारित की जा सकेंगी।










