नई दिल्ली, दिल्ली
भारत में पेट्रोल के साथ इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम अब अगले चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने कहा है कि सरकार मौजूदा E-20 स्तर से आगे बढ़कर पेट्रोल में अधिक इथेनॉल मिलाने की अनुमति देने की दिशा में काम कर रही है। इस बदलाव के लिए फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों को अहम माना जा रहा है।
तरुण कपूर ने ‘द इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्फ्रेंस 2026’ के चौथे संस्करण को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए E-20 कार्यक्रम को अब तक ‘बहुत सफल’ बताया। उन्होंने कहा कि कई वाहन कंपनियां जल्द फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियां पेश करने की योजना की घोषणा कर चुकी हैं।
फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों पर सरकार का जोर
कपूर के अनुसार, सरकार का अगला ध्यान फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों पर है। इन वाहनों के जरिए E-20 से ज्यादा इथेनॉल ब्लेंडिंग वाले पेट्रोल के इस्तेमाल को संभव बनाया जा सकता है। सरकार ऐसी ब्लेंडिंग को मंजूरी देने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ज्यादा इथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए ईंधन की उपलब्धता का ढांचा मजबूत करना जरूरी होगा। इसके तहत पेट्रोलियम बिक्री केंद्रों पर शुद्ध इथेनॉल की उपलब्धता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।
इससे भविष्य में फ्लेक्सी-फ्यूल वाहन रखने वाले उपभोक्ताओं के लिए अधिक इथेनॉल वाले ईंधन का इस्तेमाल करना आसान हो सकता है।
डीजल में भी जैव-ईंधन के विकल्प
सरकार की जैव-ईंधन रणनीति सिर्फ पेट्रोल तक सीमित नहीं है। डीजल क्षेत्र में भी जैव-ईंधन आधारित एडिटिव्स और अन्य प्रयोग किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य परिवहन क्षेत्र में जैव-ईंधन की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए नए विकल्प तलाशना है।
इसके साथ ही गोवर्धन योजना के माध्यम से जैव-ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे कृषि और जैविक कचरे से ऊर्जा तैयार करने के विकल्पों को बढ़ावा मिल सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों के बीच जैव-ईंधन पर जोर
तरुण कपूर ने पश्चिम एशिया में जारी संकट का जिक्र करते हुए जैव-ईंधन के महत्व पर जोर दिया। संकट के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की आशंका बनी हुई है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले इथेनॉल और दूसरे जैव-ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ाना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब सरकार के सामने E-20 से आगे बढ़ने के साथ-साथ फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों, शुद्ध इथेनॉल की उपलब्धता और ईंधन वितरण नेटवर्क को मजबूत करने की चुनौती होगी।










