नई दिल्ली
भारत में इस साल त्योहारी और शादी के सीजन में सोने की खरीदारी का ट्रेंड बदलता नजर आ सकता है। सोने की कीमतों में करीब 39 फीसदी की भारी बढ़ोतरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना कम खरीदने की अपील का असर बाजार पर पड़ने की आशंका है।
त्योहारों के दौरान भारत में सोने की खरीदारी काफी बढ़ जाती है, लेकिन इस बार रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंची कीमतें ग्राहकों के बजट पर दबाव डाल रही हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील ने भी ग्राहकों के सेंटीमेंट को प्रभावित किया है।
PM मोदी की अपील से बिक्री पर पड़ सकता है असर
1 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील की थी कि वे सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही सोना खरीदें। इस अपील को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब सोने की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के राष्ट्रीय सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बड़े इन्फ्लुएंसर हैं और उनकी अपील का ग्राहकों के सेंटीमेंट पर असर पड़ सकता है।
उनका अनुमान है कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद इस त्योहारी सीजन में सोने की बिक्री में करीब 10 से 12 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है।
39% महंगा हुआ सोना, ग्राहकों पर बढ़ा बोझ
सोने की कीमतों में पिछले एक साल के दौरान करीब 39 फीसदी की बढ़ोतरी ने आम ग्राहकों की खरीदारी क्षमता को प्रभावित किया है। शादी और त्योहारों के लिए सोना खरीदने वाले परिवारों को अब पहले के मुकाबले काफी ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ रही है।
कीमतों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी के कारण ग्राहक भारी आभूषणों के बजाय हल्के वजन के गहने खरीदने या खरीदारी को कुछ समय के लिए टालने का विकल्प चुन सकते हैं।
इसका सीधा असर ज्वैलरी कारोबारियों, खासकर छोटे और स्थानीय ज्वैलर्स पर पड़ सकता है।
छोटे ज्वैलर्स के सामने बढ़ सकती हैं मुश्किलें
बड़े ब्रांडेड ज्वैलरी स्टोर्स की तुलना में छोटे ज्वैलर्स का कारोबार स्थानीय ग्राहकों और शादी-ब्याह की खरीदारी पर अधिक निर्भर रहता है। अगर ग्राहक सोने की खरीदारी कम करते हैं तो छोटे कारोबारियों की बिक्री और कैश फ्लो पर दबाव बढ़ सकता है।
ज्वैलर्स को इस स्थिति में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए हल्के डिजाइन, कम वजन के आभूषण और मेकिंग चार्ज में ऑफर जैसे विकल्पों का सहारा लेना पड़ सकता है।
मई में भी PM मोदी ने की थी सोना कम खरीदने की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले मई में भी भारतीयों से सोने की खरीदारी कम करने की अपील कर चुके हैं। उस समय पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और देश के विदेशी मुद्रा खर्च से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए लोगों से सोना कम खरीदने की बात कही गई थी।
अब त्योहारी सीजन से पहले एक बार फिर ऐसी अपील आने से बाजार में इसके संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
धनतेरस और शादी के सीजन पर नजर
भारत में धनतेरस और दिवाली के दौरान सोना खरीदना शुभ माना जाता है। इसके अलावा अक्टूबर-नवंबर के दौरान शादी का सीजन भी ज्वैलरी कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।
ऐसे में ज्वैलर्स की नजर इस साल धनतेरस की बिक्री पर रहेगी। अगर ऊंची कीमतों और ग्राहकों के कमजोर सेंटीमेंट के कारण बिक्री में 10-12 फीसदी की गिरावट आती है, तो छोटे कारोबारियों पर इसका असर अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है।
क्या ग्राहक खरीदारी से पूरी तरह दूरी बनाएंगे?
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऊंची कीमतों के बावजूद भारत में सोने की सांस्कृतिक और निवेश संबंधी मांग बनी रह सकती है। त्योहार और शादी जैसे मौकों पर बड़ी संख्या में लोग सोना खरीदना जरूरी मानते हैं।
हालांकि, कीमतों में तेज बढ़ोतरी ग्राहकों के व्यवहार को बदल सकती है। लोग कम मात्रा में सोना खरीद सकते हैं, हल्के आभूषणों को प्राथमिकता दे सकते हैं या खरीदारी को बाद के लिए टाल सकते हैं।
इसलिए इस त्योहारी सीजन में सोने की ऊंची कीमत बनाम पारंपरिक मांग के बीच दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।









