बालाघाट में गर्भवती महिला से कथित यातना के विरोध में उग्र प्रदर्शन, पुलिस पर पथराव; 16 घायल

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

बालाघाट, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में गर्भवती महिला सावित्री चौधरी और उनके पति कैलाश चौधरी की गिरफ्तारी तथा थाने में कथित अमानवीय व्यवहार का मामला मंगलवार को तनावपूर्ण स्थिति में बदल गया। मरार माली समाज के लोगों ने मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर किरनापुर में धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान भीड़ उग्र हो गई और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया गया। घटना में सात पुलिसकर्मियों समेत 16 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।

प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने किरनापुर थाने का गेट खोलकर अंदर प्रवेश करने का प्रयास किया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। इसके बाद इलाके में काफी देर तक तनाव की स्थिति बनी रही।

पथराव में एसडीओपी दीपक तोमर, निरीक्षक जितेंद्र चौहान, शैलेंद्र पटेल, एसडीओपी के वाहन चालक आलोक, प्रधान आरक्षक वर्षा और महिला आरक्षक अंबिका व अविषा सहित अन्य लोग घायल हुए हैं। घायलों को किरनापुर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद कुछ घायलों को महाराष्ट्र के गोंदिया स्थित अस्पताल रेफर किया गया।

घटना की जानकारी मिलने के बाद एसपी आदित्य मिश्रा मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझाने और स्थिति सामान्य करने का प्रयास किया। पुलिस ने पथराव करने वाले लोगों की पहचान शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है।

चोरी के शक में गिरफ्तार हुआ था दंपती

पूरा मामला दो सितंबर को हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है। पुलिस ने चोरी के शक में मुंडेसरा पंचायत के टिमकीटोला निवासी कैलाश चौधरी और उनकी गर्भवती पत्नी सावित्री चौधरी को गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तारी के बाद महिला के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि थाने में महिला के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। आरोप है कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने गर्भवती महिला को निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटा और वह बेहोश हो गई। परिजनों का दावा है कि उसके शरीर पर चोट के निशान आज भी मौजूद हैं।

हालांकि, इन आरोपों की पूरी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस प्रशासन की ओर से मामले में कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है।

कलेक्टर के पास खाट पर पहुंची थी महिला

सात सितंबर को सावित्री के परिजन उसे खाट पर लेकर कलेक्टर के पास पहुंचे थे। उन्होंने अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। शिकायत के बाद एसपी ने थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया।

इसके बाद समाज के लोगों में आक्रोश बढ़ा और मंगलवार को किरनापुर में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शन के दौरान स्थिति अचानक बिगड़ गई। भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया और थाने के अंदर जाने का प्रयास किया।

पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया। पथराव के दौरान पुलिसकर्मियों के घायल होने के बाद मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल और अधिकारियों की सक्रियता बढ़ गई।

दो मामलों की जांच चुनौती

इस पूरे घटनाक्रम में अब पुलिस के सामने दो महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच की चुनौती है। पहला, गर्भवती महिला और उसके पति की गिरफ्तारी के बाद थाने में कथित दुर्व्यवहार के आरोपों की जांच। दूसरा, प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पथराव और थाने में प्रवेश के प्रयास की जांच।

पुलिस पथराव में शामिल लोगों की पहचान करने में जुटी है। वहीं प्रशासन की कोशिश है कि इलाके में कानून-व्यवस्था बनी रहे और मामले को लेकर किसी तरह की और हिंसक स्थिति पैदा न हो।

फिलहाल घटना के बाद क्षेत्र में तनाव को देखते हुए पुलिस सतर्क है। मूल मामले और प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े तथ्यों के सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।

KPN News
Author: KPN News

Leave a Comment

और पढ़ें