नई दिल्ली, दिल्ली
त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती मांग और कीमतों को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रखने और कीमतों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने सितंबर 2026 के दूसरे पखवाड़े के लिए नया बिक्री कोटा जारी किया है।
सरकार ने 16 से 30 सितंबर 2026 के लिए कुल 13.50 लाख मीट्रिक टन चीनी बिक्री कोटा तय किया है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने 15 सितंबर को जारी अधिसूचना के माध्यम से यह कोटा देश की 587 चीनी मिलों और दो रिफाइनरियों को आवंटित किया है।
त्योहारी मांग को देखते हुए फैसला
त्योहारों के दौरान देशभर में चीनी की खपत बढ़ जाती है। मिठाई की दुकानों, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और घरेलू उपभोक्ताओं की ओर से मांग बढ़ने के कारण बाजार में अतिरिक्त चीनी की जरूरत होती है।
नवरात्र और दशहरा जैसे त्योहारों के साथ मिठाई कारोबार में तेजी आती है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि बाजार में पर्याप्त स्टॉक पहले से उपलब्ध रहे, ताकि मांग बढ़ने पर आपूर्ति में कमी न आए।
अगर बाजार में मांग के मुकाबले आपूर्ति कम हो जाती है तो कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए सरकार ने बिक्री कोटा तय कर मिलों से नियंत्रित तरीके से चीनी बाजार में उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है।
587 मिलों और 2 रिफाइनरियों को कोटा
सितंबर के दूसरे पखवाड़े के लिए जारी कुल 13.50 लाख मीट्रिक टन के कोटे का आवंटन देश की 587 चीनी मिलों और दो रिफाइनरियों को किया गया है।
इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक इकाई को निर्धारित मात्रा के अनुसार चीनी की बिक्री करनी होगी। सरकार ने मिलों के लिए बिक्री और स्टॉक प्रबंधन से संबंधित दिशानिर्देश भी जारी किए हैं।
इन नियमों का उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता को व्यवस्थित रखना है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि त्योहारी सीजन में किसी क्षेत्र में अनावश्यक कमी या आपूर्ति में व्यवधान की स्थिति न बने।
महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश को बड़ा हिस्सा
देश में चीनी उत्पादन के मामले में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में है। इन राज्यों में बड़ी संख्या में चीनी मिलें हैं और यहां से देश के विभिन्न बाजारों के लिए बड़ी मात्रा में चीनी की आपूर्ति होती है।
नए बिक्री कोटे में भी महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश को बड़ा आवंटन किया गया है। इससे त्योहारी सीजन में देश के अलग-अलग हिस्सों में चीनी की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
स्टॉक प्रबंधन पर भी सख्ती
सरकार ने केवल बिक्री की मात्रा तय नहीं की है, बल्कि चीनी मिलों के स्टॉक प्रबंधन को लेकर भी दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसका मकसद यह है कि बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहे और बिक्री व्यवस्था निर्धारित नियमों के अनुसार चले।
त्योहारी मांग के दौरान स्टॉक की स्थिति पर नजर रखना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मांग बढ़ने के साथ कीमतों में तेजी की आशंका रहती है।
क्या आम लोगों को मिलेगा फायदा?
सरकार के इस कदम का सीधा उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है। पर्याप्त आपूर्ति रहने पर अचानक कीमत बढ़ने की संभावना को कम किया जा सकता है।
हालांकि, चीनी की खुदरा कीमत केवल सरकारी बिक्री कोटे पर निर्भर नहीं करती। उत्पादन, मांग, बाजार की स्थिति और अन्य लागत जैसे कई कारक कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।
फिलहाल केंद्र सरकार ने त्योहारी सीजन से पहले बाजार के लिए 13.50 लाख मीट्रिक टन का नया बिक्री कोटा जारी कर दिया है। अब 16 से 30 सितंबर के बीच मिलों और रिफाइनरियों की बिक्री पर नजर रहेगी।
आने वाले दिनों में त्योहारों की मांग बढ़ने के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए कोटे के बाद बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर क्या असर पड़ता है।









