New Delhi, Delhi
भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह वैश्विक दबाव के चलते भारी गिरावट दर्ज की गई। अब अगले सप्ताह बाजार की दिशा कई महत्वपूर्ण घरेलू और वैश्विक घटनाक्रमों से तय हो सकती है। इनमें RBI की मौद्रिक नीति समीक्षा, दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे और पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख हैं।
छोटे कारोबारी सप्ताह में बाजार पर शुरुआत से ही दबाव रहा। सोमवार को सेंसेक्स 1.52 प्रतिशत गिरा और अगले सत्रों में भी कमजोरी बनी रही। गुरुवार को सेंसेक्स में 0.79 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। पूरे सप्ताह सेंसेक्स 1,670.84 अंक टूटकर 71,909.70 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 3 प्रतिशत से अधिक गिरकर 22,421.95 पर आ गया।
तकनीकी स्थिति कमजोर
तकनीकी आधार पर निफ्टी लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ है। साप्ताहिक RSI करीब 31.06 पर है, जो 50 के तटस्थ स्तर से काफी नीचे है। यह बाजार में कमजोर मोमेंटम का संकेत देता है।
हालांकि RSI ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंच रहा है, इसलिए निचले स्तरों पर बीच-बीच में तकनीकी रिकवरी देखने को मिल सकती है। निफ्टी के लिए 22,800 और 23,000 के स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस माने जा रहे हैं। इन स्तरों के ऊपर टिकाऊ बढ़त मिलने पर बिकवाली का दबाव कम हो सकता है। दूसरी ओर 22,350 और 22,180 के स्तर प्रमुख सपोर्ट हैं।
RBI नीति और Q2 नतीजे
अगले सप्ताह RBI की मौद्रिक नीति समीक्षा बाजार का सबसे महत्वपूर्ण घरेलू ट्रिगर हो सकती है। निवेशक ब्याज दरों के फैसले के साथ महंगाई और आर्थिक वृद्धि को लेकर RBI के रुख पर भी नजर रखेंगे। केंद्रीय बैंक के संकेत घरेलू ब्याज दरों और वित्तीय बाजारों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।
दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन से बाजार को घरेलू मांग और कारोबारी गतिविधियों की स्थिति के संकेत मिल सकते हैं।
पश्चिम एशिया का तनाव और कच्चा तेल
वैश्विक बाजारों पर पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर बना हुआ है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने, महंगाई को लेकर चिंता और ऊंची ऊर्जा कीमतों ने निवेशकों को सतर्क किया है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी से उभरते बाजारों में निवेश का आकर्षण भी प्रभावित हो सकता है।
कच्चे तेल की कीमतें भी महत्वपूर्ण रहेंगी। ब्रेंट क्रूड हाल के ऊंचे स्तरों से नीचे आया है, क्योंकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति युद्ध-पूर्व स्तरों के करीब पहुंचने लगी है।
घरेलू और अमेरिकी आंकड़ों पर नजर
घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़े अपेक्षाकृत मजबूत हैं। अगस्त में भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि 8 प्रतिशत रही, जबकि विनिर्माण क्षेत्र में 9 प्रतिशत और बिजली एवं गैस आपूर्ति में 12.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
वैश्विक स्तर पर अमेरिका के नॉन-फार्म पेरोल्स और ISM मैन्युफैक्चरिंग PMI जैसे आर्थिक आंकड़े भी बाजार की धारणा को प्रभावित करेंगे।
कुल मिलाकर अगले सप्ताह RBI नीति, Q2 नतीजे, पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख ट्रिगर रहेंगे। इन घटनाक्रमों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।










