ना कजरे की धार वाली धुन पर बना पाकिस्तानी लोक गीत ‘चलरे चलरे वाल’, 50 मिलियन व्यूज पार

ना कजरे की धार वाली धुन पर बना पाकिस्तानी लोक गीत 'चलरे चलरे वाल', 50 मिलियन व्यूज पार

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पाकिस्तान का पारंपरिक सराइकी लोक गीत ‘चलरे चलरे वाल’ अचानक इंस्टाग्राम पर बेहद लोकप्रिय हो गया है। गायिका शांजी सिबल के इस एकॉस्टिक वर्जन को अब तक 50 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है और इसे 6.5 मिलियन से ज्यादा लाइक्स मिले हैं। यह लोक गीत उन नए श्रोताओं तक पहुंचा है जिन्होंने इसे इससे पहले कभी नहीं सुना था।

‘चलरे चलरे वाल’ की पहचान

यह गीत पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र का पारंपरिक सराइकी लोक गीत है जिसे कई वर्षों से कई गायकों ने अपनी अलग पहचान दी है। खासकर मुहम्मद हुसैन बंदियालवी और स्वर्गीय शफाउल्लाह खान रोखरी ने इस गीत को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गायक इसे अपनी शैली के अनुसार प्रस्तुत करते आ रहे हैं जिससे इसका संगीत पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित है।

हाल ही में भारतीय पंजाबी गायिका सुनंदा शर्मा ने भी इस गीत का अपना वर्जन साझा किया है, जिससे इसकी लोकप्रियता और बढ़ी है। उनके योगदान से यह पारंपरिक गीत भारत में भी नए सुनने वालों तक पहुंचा।

‘ना कजरे की धार’ के साथ तुलना

सोशल मीडिया पर ‘चलरे चलरे वाल’ को लेकर भारतीय दर्शकों ने इसकी धुन और अंदाज में 1994 की फिल्म ‘मोहरा’ के गीत ‘ना कजरे की धार’ से समानताएं देखीं। ‘ना कजरे की धार’ का संगीत विजू शाह ने तैयार किया था और इसे पंकज उधास और साधना सरगम ने आवाज दी थी।

हालांकि दोनों गीतों के बीच कोई आधिकारिक संबंध या क्रेडिट नहीं दिया गया है। ‘ना कजरे की धार’ वास्तव में 1970 के दशक की एक धुन पर आधारित है जिसे कल्याणजी-आनंदजी ने बनाया था और जिसे मुकेश ने रिकॉर्ड किया था, लेकिन वह रिकॉर्डिंग सामने नहीं आई। बाद में विजू शाह ने इसे 1990 के दशक के संगीत के अनुरूप दोबारा तैयार किया।

यह गाना फिल्म ‘मोहरा’ के सबसे लोकप्रिय रोमांटिक गीतों में से एक बन गया। इसके हल्के-फुल्के और आकर्षक संगीत ने दर्शकों के बीच इसे यादगार बना दिया।

‘चलरे चलरे वाल’ और ‘ना कजरे की धार’ दोनों ही गीतों ने अपनी-अपनी जगह पर लोक और लोकप्रिय संगीत प्रेमियों के दिल में खास जगह बनाई है। दोनों की धुनें और संगीत पीढ़ियों को जोड़ने में सहायक साबित हो रहे हैं।

इस लोक गीत की नई लोकप्रियता यह दर्शाती है कि पारंपरिक संगीत आज भी युवा पीढ़ी के बीच जीवंत और प्रशंसनीय है। सोशल मीडिया की ताकत से इस तरह के गीतों को अधिक लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।

अंततः, ‘चलरे चलरे वाल’ का अलग अंदाज और ‘ना कजरे की धार’ का बॉलीवुड कनेक्शन संगीत प्रेमियों के लिए एक दिलचस्प सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करता है। दोनों गीतों में संगीत और भावनाओं का गहरा संबंध परिलक्षित होता है, जो सुनने वालों को जोड़ता है।

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KPN News
Author: KPN News

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