लिंकन ने 200 साल पहले कहा था: मुरली मनोहर जोशी ने CEC ज्ञानेश कुमार पर जताई आपत्ति

लिंकन ने 200 साल पहले कहा था: मुरली मनोहर जोशी ने CEC ज्ञानेश कुमार पर जताई आपत्ति

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नई दिल्ली: चुनाव आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर विपक्ष द्वारा चलाए जा रहे बवाल पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि वे न सरकार के समर्थन में हैं और न विरोध में, बल्कि लोकतंत्र की मूलपरंपराओं पर जोर दे रहे हैं। यह टिप्पणी उन्होंने दिल्ली में गुरुवार को मीडिया से बातचीत के दौरान की।

लोकतंत्र की परिभाषा और मुरली मनोहर जोशी की राय

जोशी ने कहा कि लोकतंत्र का मतलब है जनता की सरकार, जो जनता द्वारा चुनी जाती है और जनता के हित में काम करती है। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा यही कहता हूं कि जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए सरकार स्थायी होती है।” उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के दर्शन को उद्धृत करते हुए बताया कि 200 साल पहले ही लिंकन ने लोकतंत्र की यही रूपरेखा दी थी।

उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत रहता है जब चुनाव निष्पक्ष हों, सरकार जवाबदेह हो, नौकरशाही पारदर्शी हो और विपक्ष जिम्मेदार तथा संवेदनशील हो। साथ ही एक स्पष्ट वैकल्पिक योजना भी होनी चाहिए। यह सभी तत्व लोकतंत्र को टिकाऊ बनाते हैं।

संविधान का सम्मान और न्यायपालिका की भूमिका

मुरली मनोहर जोशी कहा कि लोकतंत्र के सभी काम संविधान के दायरे में रहकर होने चाहिए। अगर कहीं भी संविधान का उल्लंघन होता है तो इस मामले को सुप्रीम कोर्ट को देखना चाहिए। लोकतंत्र के कार्य प्रणाली में यही एक सही तरीका है। जोशी ने साफ किया कि यह नियम सभी पक्षों पर लागू होता है।

सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर विपक्ष का जो भी प्रदर्शन हो रहा है, उस पर जोशी ने तटस्थता बनाए रखी और कहा कि उचित प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। उन्होंने विधिक दायरे में काम करने का आग्रह किया।

वहीं, विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में मनमाने तरीके से काफी नामों को हटाया है। इस पर एक अखबार में रिपोर्ट भी प्रकाशित हुई है, जिसके आधार पर विपक्ष ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

हालांकि, चुनाव आयोग ने इस रिपोर्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट को स्पष्टीकरण दे चुका है और कोर्ट में सुनवाई भी जारी है। इसके बावजूद विपक्ष चर्चा खत्म नहीं कर रहा है और हर हाल में सीईसी को पद से हटवाने पर अड़ा हुआ है।

पूर्व मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने इस विवाद को लोकतंत्र के लिए चुनौती बताया लेकिन साथ ही कहा कि न्यायपालिका के फैसले का सम्मान करना होगा। उन्होंने लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के पालन पर जोर दिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति लिंकन की लोकतंत्र की परिभाषा आज भी राजनीतिक संवाद में महत्वपूर्ण मानी जाती है, और जोशी ने इसी तर्ज पर वर्तमान विवाद को समझने की कोशिश की है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि सबकुछ संविधान और कानून के तहत ही तय होगा।

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KPN News
Author: KPN News

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