नई दिल्ली। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने छात्र आंदोलनों और नई शिक्षा नीति पर अपनी स्पष्ट राय व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बच्चों की मांगों को डंडा मारकर दबाना उचित नहीं है और इन्हें संवाद के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद पर भी अपना ख्याल साझा किया।
नई शिक्षा नीति और छात्र आंदोलन
जोशी ने कहा कि नई शिक्षा नीति लागू हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है और इसके परिणामों का तुरंत आकलन करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने बताया कि किसी भी नीति के प्रभाव को समझने के लिए पर्याप्त समय और अनुभव जरूरी होता है। छात्र आंदोलन को लेकर उन्होंने ध्यान लगाने की जरूरत बताते हुए कहा कि बच्चों की भावनाओं को समझकर समाधान निकालना चाहिए, न कि उनके ऊपर बल प्रयोग किया जाना चाहिए।
उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में बदलाव समय के साथ स्पष्ट होता है और इस प्रक्रिया को हतोत्साहित करने के बजाय मोटिवेट किया जाना चाहिए। छात्र अपनी मांगों को बिना हिंसा के सार्वजनिक करें तो बेहतर संवाद संभव होगा। जोशी ने युवा वर्ग की आवाज़ को लोकतंत्र की ताकत बताया।
CEC विवाद और लोकतंत्र
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों के विरोध पर मुरली मनोहर जोशी ने लोकतंत्र के महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का मतलब सरकार जनता की, जनता द्वारा और जनता के लिए होना चाहिए। निष्पक्ष चुनाव और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था के बुनियादी स्तंभ हैं।
जोशी ने यह भी कहा कि हर राजनीतिक दल को अपनी भूमिका जिम्मेदारी से निभानी चाहिए ताकि लोकतंत्र मजबूत बने। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास सरकार के सामने वैकल्पिक कार्यक्रम भी होना चाहिए, जिससे वह संवैधानिक रूप से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सके।
जोशी ने संविधान के अंतर्गत सभी गतिविधियां और संस्थाएं चलाने की बात करते हुए यह भी कहा कि यदि किसी मुद्दे पर संविधान के उल्लंघन का सवाल उठता है तो न्यायपालिका को फैसला करना चाहिए। वे विशेष रूप से सुप्रीम कोर्ट का उल्लेख करते हुए न्यायपालिका के महत्व पर जोर दिए।
विपक्ष द्वारा चलाए जा रहे CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर उन्हें नियंत्रित करने की पुलिस की कार्रवाई भी चर्चा में रही। इंडिया गठबंधन के नेताओं द्वारा दिल्ली में मार्च करने की कोशिश पर पुलिस ने रोक लगाई और कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। इसके बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी है और CEC के इस्तीफे की मांग भी बनी हुई है।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों को हमेशा अनियमितताओं से इनकार करते हुए अपनी प्रक्रियाओं को नियमों के अनुरूप बताया है। वहीं विपक्षी दल इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाते रहे हैं।
जोशी की यह राय भाजपा के वरिष्ठ नेता के तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसने छात्र आंदोलन, शिक्षा नीति और चुनाव आयोग विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर संतुलित और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण रखा है।










