उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चाइनीज मांझे का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार सुबह बर्लिंगटन चौराहे के पास एक बाइक सवार युवक मंगेश के गले में अचानक चाइनीज मांझा फंस गया। मांझे से गला कटने के कारण बाइक का संतुलन बिगड़ा और वह डिवाइडर से टकराकर गिर पड़े। गनीमत यह रही कि उनकी जान बच गई, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उन्हें अस्पताल में चार टांके लगाना पड़े।
मांगेश की आपबीती और हादसे का विवरण
मंगेश, जो तकरोही के अमराई गांव के निवासी और आर्केस्ट्रा व जागरण में ढोलक बजाने का काम करते हैं, अपने काम पर जा रहे थे। जैसे ही वे बर्लिंगटन चौराहे के पास बाइक चला रहे थे, हवा में लटका चाइनीज मांझा उनके गले में फंस गया। तेज मांझे की धार से उनका गला कट गया। हादसे के बाद बाइक बुरी तरह डिवाइडर से टकराई और मंगेश घायल हो गए। वहां से गुजर रहे लोगों ने तुरंत उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।
डॉक्टरों ने उनके घाव की स्थिति गंभीर पाई और गले में चार टांके लगाए। मंगेश की यह घटना उन कई हादसों की ताजा कड़ी है जो चाइनीज मांझे के कारण हो रहे हैं। इस खतरे से लोग अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।
चाइनीज मांझे के कारण हुईं पिछली दुर्घटनाएं
चाइनीज मांझे से हुए हादसों का इतिहास लंबा है। 22 जून 2022 को कैंट इलाके में एक युवक घायल हुआ था। 23 मई 2023 को ठाकुरगंज के पीर बुखारा में मांझे से चोट लगी। 27 मार्च 2024 को ईदगाह रोड पर एसएसआई का अंगूठा कट गया। बीबीडी इलाके में फरवरी 2025 में बाइक सवार घायल हुए। 3 सितंबर 2025 को हैदरगंज में दो बेटियों को स्कूल से ले जा रहे व्यवसायी आसिम मार्शल मांझे की चपेट में आए। कई ऐसे मामलों ने चाइनीज मांझे के खतरे को बढ़ा दिया है।
साल 2026 में इस मांझे ने एक जान भी ली। 3 फरवरी को हैदरगंज ओवरब्रिज के पास दुबग्गा निवासी शोएब का गला कट गया, जिनकी मृत्यु हो गई। अगले दिन शहीद पथ पर पूर्व एयरफोर्स कर्मी बृजेश राय के होंठ और दाढ़ी के निचले हिस्से पर घाव हुआ। 14 सितंबर को सिटी स्टेशन के पास वकील राघवेंद्र को तीन टांके लगने पड़े।
इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि चाइनीज मांझा अब भी सड़कों पर खतरनाक स्थिति पैदा कर रहा है। इसके कारण घायल और मृतकों की संख्या बढ़ती जा रही है।
प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल
चाइनीज मांझे की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध के बावजूद, इसका इस्तेमाल लगातार हो रहा है। यह सवाल उठता है कि प्रशासन असल में इस जानलेवा मांझे पर प्रभावी नियंत्रण कब लगाएगा। सड़क सुरक्षा के लिए जरूरी है कि इसके उपयोग पर कड़ी निगरानी रखी जाए और जरुरत पड़ने पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि लोगों की जिंदगी सुरक्षित रह सके।
सफी अहमद, वरिष्ठ पत्रकार, लखनऊ, कहते हैं कि इस मुद्दे पर जागरूकता और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों जरूरी हैं। बिना इसके, ऐसे हादसे रुकने के बजाय बढ़ सकते हैं।
यह भी पढ़ें:










