नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने तिहाड़ जेल में बंद दीपक नंदा उर्फ दीपक खत्री की भूमिका पर नई जांच की है, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। दीपक ने 10वीं में फेल होने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी, बावजूद इसके वह कैसे लॉरेंस सिंडिकेट के सक्रिय सदस्य और प्रमुख मामा बन गया, यह सवाल पुलिस के सामने है।
दीपक की अपराध की यात्रा
सूत्रों के मुताबिक दीपक की शुरुआत नीरज बवानिया गैंग से हुई। इसके बाद वह धीरे-धीरे लॉरेंस बिश्नोई के करीब पहुंचा। उसकी परिवार की शुरुआत पंजाब से दिल्ली के पीरागढ़ी स्थित रिफ्यूजी कैंप में हुई, जहां ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद वे शिफ्ट हुए। नांगलोई के मुल्तान नगर स्कूल में 10वीं फेल होने के बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी और स्थानीय दबंगों से संपर्क बढ़ाया।
दीपक का नाम गैंगस्टर प्रवेश मान, पंकज सहरावत और राहुल भारद्वाज के माध्यम से नीरज बवानिया गैंग में जुड़ाव के रूप में सामने आया। 2024 में एलएलबी कोर्स पूरा करने के बाद वह पेशेवर वकील और उनकी पत्नी के साथ काम करने लगा, लेकिन जल्दी ही लॉरेंस और अन्य गैंगस्टरों के कानूनी मामलों में घुस गया।
अवैध कानूनी मदद और सिंडिकेट से जुड़ाव
दीपक की पहली मुलाकात लॉरेंस से 2021 में तब हुई, जब उसे राजस्थान से पुलिस रिमांड पर लाया गया था। इसके बाद कानूनी मदद उपलब्ध कराने के बहाने वह लॉरेंस से लगातार मिलने लगा। काला जठेड़ी, जग्गू भगवानपुरिया और संपत नेहरा जैसे गैंगस्टर भी उसकी पहुंच में आए।
जब लॉरेंस या उसके साथी पुलिस रिमांड पर होते, दीपक वकील के रूप में उनके साथ पहुंचता था। अगस्त 2021 में युवा अकाली नेता विक्की मिड्डूखेड़ा की हत्या के बाद जेल में बंद लॉरेंस के साथियों के खर्चों के लिए पैसे जुटाने की जिम्मेदारी भी उसे दी गई।
पुलिस की जांच में यह बात भी सामने आई कि दीपक ने बीए-एलएलबी में दाखिले के लिए फर्जी 12वीं मार्कशीट का इस्तेमाल किया था। यह मामला अमरोहा के रजबपुर थाने में दर्ज हुआ है। पुलिस इसके पीछे फर्जी दस्तावेज बनाने वालों की तलाश कर रही है।
दीपक कई केसों में वकील के रूप में पेश भी हो चुका है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह सिर्फ अपराधी नहीं बल्कि कानूनी कवर भी प्रदान करता था। पुलिस का कहना है कि लॉरेंस सिंडिकेट से जुड़े अन्य वकीलों पर भी नजर रखी जा रही है ताकि उनके एजुकेशनल बैकग्राउंड की जांच की जा सके।
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि कैसे एक 10वीं फेल युवक बिना उचित कागजात के खुद को वकील बनाकर संगठन की कानूनी जरूरतों को पूरा करता रहा। दीपक के इस जुड़ाव ने सिंडिकेट के कानूनी और वित्तीय मामलों को आसान बनाया।
आगे की जांच में पुलिस को उम्मीद है कि वह दीपक और उसके साथियों के अन्य काले कारनामों का भंडाफोड़ कर सकेगी। फिलहाल वह सभी दस्तावेज और सहभागियों की पहचान करने में जुटी है।










