रियाद, सऊदी अरब। सऊदी अरब में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शामिल अरामको के दाहरान स्थित मुख्यालय पर हूती विद्रोहियों के बैलिस्टिक मिसाइल हमले से भारी नुकसान होने की खबर है। मंगलवार देर रात हुए इस हमले के बाद मुख्यालय की इमारत में भीषण आग लग गई और चारों ओर धुआं फैल गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, भवन की ऊपरी तीन मंजिलों को काफी नुकसान पहुंचा है। इन मंजिलों पर कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठते थे।
हमले के बाद इमारत में लगी आग ऊपरी मंजिलों से नीचे की ओर फैलने की खबर है। इस घटना में तीन लोगों की मौत होने की चर्चा भी सामने आई है, हालांकि उपलब्ध जानकारी में इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। हमले से कंपनी के मुख्यालय को हुए नुकसान और आग की स्थिति को लेकर क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है।
रियाद और अल-खर्ज भी बने निशाना
अरामको के मुख्यालय पर हमले के साथ सऊदी अरब के अन्य प्रमुख स्थानों पर भी हूती विद्रोहियों के हमलों की खबर है। जानकारी के अनुसार, हूतियों ने राजधानी रियाद पर बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन के जरिए हमला किया। इसके अलावा अल-खर्ज को भी क्रूज मिसाइल से निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।
इन हमलों के कारण सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। तेल कंपनी के मुख्यालय को निशाना बनाए जाने से ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में तेल उत्पादन या आपूर्ति पर पड़े वास्तविक असर का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।
अमेरिका के युद्ध में शामिल होने की संभावना
मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि युद्ध में अमेरिका के शामिल होने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। उनके बयान से संघर्ष के और व्यापक होने की आशंका बढ़ गई है। यदि युद्ध का दायरा बढ़ता है, तो इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर पड़ सकता है।
रूस, चीन और ओमान की युद्धविराम की कोशिश
इस बीच, युद्ध को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी किए जा रहे हैं। हूती विद्रोहियों का कहना है कि रूस और चीन की ओर से युद्धविराम के संबंध में उनसे संपर्क किया गया है। ओमान भी संघर्ष को समाप्त कराने के प्रयासों में शामिल बताया गया है।
लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच युद्धविराम की पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, बातचीत के नतीजे और संघर्ष समाप्त होने की संभावनाओं को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। आने वाले समय में कूटनीतिक प्रयासों की सफलता से ही क्षेत्र में तनाव कम होने की दिशा तय हो सकेगी।










