नई दिल्ली, दिल्ली। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित करने में जुटे हैं। इन मिसाइलों की मारक क्षमता सऊदी अरब और इजरायल तक बताई जा रही है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन मिसाइलों के निर्माण में चीन से भेजे गए कुछ महत्वपूर्ण उपकरणों और धातु के पुर्जों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में पहले से जारी तनाव के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च (सीएआर) की जांच में सामने आए विवरण के अनुसार, हूतियों द्वारा विकसित किए जा रहे ये हथियार ईरान की खेबर शेकन बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली पर आधारित प्रतीत होते हैं। यह एक सटीक निर्देशित मिसाइल है, जिसे उड़ान के दौरान दिशा बदलने की क्षमता के लिए जाना जाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस डिजाइन पर आधारित मिसाइल की संभावित मारक दूरी करीब 1,200 मील तक हो सकती है। इतनी दूरी होने पर सऊदी अरब और इजरायल के बड़े हिस्से इसकी पहुंच में आ सकते हैं।
जब्त खेपों से सामने आए मिसाइल निर्माण के संकेत
सीएआर की रिपोर्ट यमन के अधिकारियों द्वारा जुलाई में जब्त की गई दो खेपों की जांच पर आधारित है। इन खेपों में मिसाइल निर्माण से संबंधित उपकरणों को अन्य सामान के बीच छिपाकर भेजे जाने की जानकारी दी गई है। जब्त सामग्री में मिसाइल मोटर और उसके बाहरी ढांचे के लिए तैयार किए गए विशेष धातु के पुर्जे शामिल थे।
इसके अलावा, मिसाइल की उड़ान के दौरान स्थिरता बनाए रखने में इस्तेमाल होने वाले फिन्स और खेबर शेकन श्रृंखला के ठोस ईंधन वाले रॉकेट मोटर से संबंधित हिस्से भी मिले। इन उपकरणों की प्रकृति से संकेत मिलता है कि इनका उपयोग उन्नत मिसाइलों के निर्माण या उनके कलपुर्जों को तैयार करने में किया जा सकता है।
चीनी कंपनी का दस्तावेजों में उल्लेख
रिपोर्ट के अनुसार, जब्त खेपों से जुड़े शिपिंग दस्तावेजों में चीन की एक प्रिसिजन-मेटल निर्माता कंपनी का उल्लेख मिला है। यह कंपनी एयरोस्पेस क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले घटकों के निर्माण में विशेषज्ञ बताई गई है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कुछ उपकरणों का नागरिक क्षेत्रों में भी इस्तेमाल संभव है। दूसरी ओर, कुछ पुर्जे विशेष रूप से मिसाइल निर्माण के लिए तैयार किए गए प्रतीत होते हैं। इसलिए इन सामग्रियों की मौजूदगी को चीन सरकार की प्रत्यक्ष सैन्य सहायता का निर्णायक प्रमाण मानने से पहले अतिरिक्त पुष्टि जरूरी है।
सऊदी अरब पर बढ़ते हमलों के बीच बढ़ी चिंता
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब हाल के हफ्तों में सऊदी अरब पर हूती हमलों में बढ़ोतरी की खबरें आई हैं। रियाद के नेतृत्व वाली नाकाबंदी और क्षेत्रीय तनाव को भी इस स्थिति से जोड़ा जा रहा है। हॉर्मुज क्षेत्र में ईरान के हमलों के साथ बढ़ते संघर्ष का असर तेल की कीमतों पर पड़ने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हूतियों के व्यवहार को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। ऐसे हालात में लंबी दूरी की मिसाइलों के विकास से मध्य पूर्व में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं। हालांकि, मिसाइलों की वास्तविक तैनाती, उनकी मौजूदा क्षमता और संभावित लक्ष्यों के बारे में स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।










