अमेरिका में नौकरी के आधार पर ग्रीन कार्ड पाने वाले भारतीयों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट ने अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट के PERM प्रोग्राम के नियमों में बदलाव के प्रस्ताव को फेडरल रिव्यू में मंजूरी दे दी है। इसके बाद इस प्रस्ताव को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित कर जनता की राय ली जाएगी।
PERM प्रोग्राम में बदलाव का मकसद
लेबर डिपार्टमेंट का यह प्रस्ताव नौकरी-आधारित ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरशिप प्रक्रिया को और पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए है। PERM प्रोग्राम 2005 के बाद से बिना बड़े बदलाव के चल रहा था। इसमें अब वर्कर्स को स्पॉन्सर करने से पहले कंपनियों की अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी देने की कोशिशों में सुधार लाना है। यह नियम अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी और गैर-भेदभाव संबंधी नियमों को भी मजबूत करेगा।
PERM लेबर सर्टिफिकेशन प्रक्रिया के तहत, कंपनियों को यह दिखाना होता है कि उनके पास नौकरी के लिए उपयुक्त सेल्फ अमेरिका में उपलब्ध नहीं है, तब ही वह विदेशी वर्कर्स को स्पॉन्सर कर सकते हैं। यह नियम खासकर EB-2 और EB-3 कैटेगरी में आने वाले भारतीय वर्कर्स को प्रभावित करता है।
प्रस्तावित नियमों की मुख्य बातें
- हायरिंग प्रक्रिया में बदलाव, जिससे अमेरिकी कर्मचारियों की भर्ती में न्यूनतम आवश्यकताएं बदली जा सकती हैं।
- छंटनी से जुड़े नियमों को कड़ा करना, विशेषकर उन मामलों में जहां अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी हुई हो।
- भर्ती के दौरान गैर-भेदभाव नियमों के पालन के लिए कंपनी की जिम्मेदारियों को बढ़ाना।
इन नियमों का मकसद अमेरिकी वर्कर्स की सुरक्षा के साथ-साथ विदेशी कर्मचारियों के साथ न्याय सुनिश्चित करना है। फिलहाल भारतीय वर्कर्स इस बदलाव की वजह से चिंतित हैं क्योंकि इससे उनकी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
लेबर डिपार्टमेंट ने कहा है कि PERM प्रोग्राम के बदलाव तीन मुख्य क्षेत्र – हायरिंग, छंटनी और गैर-भेदभाव नियमों पर फोकस करेंगे। इससे रोजगार की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और निष्पक्ष बनेगी।
फेडरल रजिस्टर में प्रस्तावित नियम प्रकाशित होने के बाद, लगभग 30 से 60 दिनों तक जनता और विशेषज्ञ अपनी प्रतिक्रिया दे सकेंगे। इसके बाद ही नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा। यह बदलाव तभी लागू होंगे जब नियमों की अंतिम मंजूरी के साथ तारीख तय की जाएगी।
भारतीय वर्कर्स को इस नए प्रस्तावित बदलाव के बारे में सूचित रहकर अपनी आगे की योजना बनानी चाहिए क्योंकि इन नियमों के लागू होने के बाद इमिग्रेशन प्रक्रिया पर इसका सीधा असर पड़ेगा।










