पीडियाट्रिशियन डॉक्टर माधवी भारद्वाज ने हाल ही में अपनी ओपीडी में 11 साल की एक बच्ची की कहानी साझा की। बच्ची ने बताया कि उसकी दोस्त शॉर्ट्स पहनती हैं, लेकिन वह खुद इसे पहनने में शर्म महसूस करती है। यह बात सुनकर डॉक्टर ने पेरेंट्स और अन्य सभी को अहम सलाह दी है।
बच्ची की तकलीफ और डॉक्टर की प्रतिक्रिया
डॉक्टर माधवी भारद्वाज ने बताया कि बच्ची को इस बात से समस्या है कि वह अपनी पसंद की ड्रेस में स्वतंत्रता से नहीं रह पाती। खासतौर से जब उसकी दोस्त बिना हिचक के शॉर्ट्स पहनती है, तो उसे असहज महसूस होता है।
जब डॉक्टर ने बात को गहराई से समझा तो उन्हें पता चला कि यह शर्म सिर्फ बच्ची की नहीं, बल्कि उसके पारिवारिक और सामाजिक परिवेश की भी वजह है। डॉक्टर ने इसे नए जमाने के फैशन और बच्चों की मानसिकता के बीच की दूरी बताते हुए चिंता जताई।
डॉक्टर ने क्या सलाह दी?
डॉक्टर माधवी ने पेरेंट्स को सलाह दी कि वे बच्चों को उनकी पसंद के कपड़े पहनने की स्वतंत्रता दें। साथ ही बच्चों के मनोभावों को समझने और उन्हें सपोर्ट करने पर जोर दिया। बच्चे को ट्रोल या नकारात्मक बातों से बचाने के लिए उन्हें खुलकर बातचीत करने के लिए प्रेरित करें।
डॉक्टर ने यह भी कहा कि बच्चे की समझदारी बढ़ाने के लिए पेरेंट्स को सही मार्गदर्शन देना चाहिए ताकि वह आत्मविश्वास से भरा महसूस करे और किसी भी बाहरी दबाव में न आए।
माधवी भारद्वाज ने बताया कि कई बार बच्चे अपने डर या असहजता को प्रकट नहीं कर पाते। ऐसे में परेशान बच्चे की बात सुनना जरूरी है ताकि वे मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकें।
वहैं, फैशन और पहनावे को लेकर बच्चों के मन में पैदा होने वाली झिझक को हटाना पेरेंट्स की जिम्मेदारी भी है। उन्हें बच्चों की पसंद का सम्मान करना चाहिए और सामाजिक दबाव से लड़ने के लिए तैयार करना चाहिए।
डॉक्टर माधवी की यह अपील सभी पेरेंट्स और अभिभावकों के लिए है कि वे अपने बच्चों की भावनाओं को समझें, उन्हें खुला माहौल दें और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें। यह बच्चों के मानसिक विकास और आत्मविश्वास के लिए जरूरी है।
यह मामला समाज में फैशन और सहजता के बीच की खाई को दिखाता है और हमें बच्चों की भावनाओं का सम्मान करते हुए उनकी भूमिका समझनी चाहिए।










