इंदौर एयरपोर्ट: ‘पिक एंड ड्रॉप’ के नाम पर वसूली का ‘ट्रैप’? 7 मिनट की समय-सीमा पर PMO तक पहुंची शिकायत

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इंदौर एयरपोर्ट: ‘पिक एंड ड्रॉप’ के नाम पर वसूली का ‘ट्रैप’? 7 मिनट की समय-सीमा पर PMO तक पहुंची शिकायत

इंदौर | देश के सबसे स्वच्छ शहर और स्मार्ट सिटी का ताज पहनने वाले इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट की छवि पर एक धब्बा लगता दिख रहा है। ‘खबर पर नजर’ के विश्लेषण में यह सामने आया है कि एयरपोर्ट पर पार्किंग विवाद अब केवल जाम की समस्या नहीं, बल्कि यात्रियों की जेब काटने का एक ‘सुनियोजित सिस्टम’ बनता जा रहा है। मामला अब इतना गंभीर हो चुका है कि इसकी गूंज प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच गई है।

क्या है 7 मिनट का ‘चक्रव्यूह’?

‘खबर पर नजर’ को मिली जानकारी और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो यह बताते हैं कि एयरपोर्ट के पिक-एंड-ड्रॉप ज़ोन में जानबूझकर लंबी कतारें लगवाई जा रही हैं।

* नियम: प्रवेश से निकास तक 7 मिनट फ्री हैं।

* हकीकत: एग्जिट गेट पर प्रक्रिया इतनी धीमी होती है कि यात्री का समय कतार में ही खत्म हो जाता है।

* परिणाम: जैसे ही समय सीमा खत्म होती है, बूम बैरियर गिरता है और यात्री से पेनल्टी वसूली जाती है।

यात्रियों का आरोप है, “जाम एयरपोर्ट प्रबंधन की नाकामी से लगता है, लेकिन उसका भुगतान हमें करना पड़ता है। यह सुविधा शुल्क नहीं, बल्कि अव्यवस्था टैक्स है।”

प्रबंधन के दावों की पोल खोलती हकीकत

एयरपोर्ट प्रबंधन अक्सर “पीक आवर्स में अधिक भीड़” का तर्क देकर पल्ला झाड़ लेता है। लेकिन ‘खबर पर नजर’ का सवाल है—अगर भीड़ का समय तय है, तो प्रबंधन के इंतजाम नाकाफी क्यों हैं?

भुगतान के लिए एग्जिट गेट पर खड़ी गाड़ियाँ यह चीख-चीख कर बता रही हैं कि समस्या किसी एक वाहन की नहीं, बल्कि पूरे ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम की है। पारदर्शिता की कमी और स्टाफ की ढलाई को ‘भीड़’ के नाम पर छिपाया जा रहा है।

सिस्टम ‘रीसेट’ की मांग: क्या हैं समाधान?

इंदौर की जनता और पीड़ित यात्रियों की मांग अब ‘खेद’ सुनने की नहीं, बल्कि ‘ठोस कार्रवाई’ देखने की है। ‘खबर पर नजर’ इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए निम्नलिखित बिंदुओं को आवश्यक मानता है:

* ⏱️ समय सीमा बढ़े: फ्री विंडो को 7 मिनट से बढ़ाकर 12 मिनट किया जाए।

* 🛣️ फास्ट ट्रैक एग्जिट: सिर्फ ड्रॉप करके निकलने वालों के लिए अलग लेन बने, जिससे 60-70% जाम खत्म हो सके।

* 🤖 ऑटोमेशन: टाइम ट्रैकिंग पूरी तरह ऑटोमेटेड हो और डिस्प्ले पर लाइव टाइम दिखे।

* ⚖️ जवाबदेही: जाम लगने पर पार्किंग कॉन्ट्रैक्टर पर पेनल्टी लगे, न कि यात्री पर।

निष्कर्ष: स्मार्ट सिटी को चाहिए स्मार्ट सिस्टम

इंदौर जैसा शहर, जो अपनी कार्यशैली के लिए देश भर में मिसाल है, अपने एयरपोर्ट पर ऐसी ‘लूट’ का हकदार नहीं है। यात्रियों से वसूली के नाम पर पैदा किया गया यह जाम सुधार की मांग नहीं, बल्कि सिस्टम रीसेट की मांग करता है।

‘खबर पर नजर’ इस मुद्दे पर तब तक सवाल उठाता रहेगा, जब तक एयरपोर्ट अथॉरिटी यात्रियों को एक पारदर्शी और सुगम व्यवस्था नहीं देती।

🖊️ रिपोर्ट: खबर पर नजर टीम

(जनहित में जारी और सिस्टम से

जवाब मांगती एक मुहिम)

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Author: KPN News

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