अयोध्या से सम्मेद शिखरजी और इंदौर के कांच मंदिर तक गूंज रहा आस्था का स्वर; धर्म और संस्कृति के नए युग में भारत
देशभर के भव्य मंदिरों और जैन महातीर्थों के साथ ‘इंदौर’ ने भी बनाई अलग पहचान; गोम्मटगिरी और कांच मंदिर की वास्तुकला देख पर्यटक अभिभूत
खबर पर नजर ब्यूरो | इंदौर/विशेष रिपोर्ट
भारत की पावन धरा पर जहाँ एक ओर सनातन के भव्य मंदिर विश्व पटल पर चमक रहे हैं, वहीं जैन तीर्थों की त्याग और तपस्या की गाथाएं भी जन-जन तक पहुँच रही हैं। ‘खबर पर नजर’ की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए कैसे देश के बड़े तीर्थों के साथ-साथ हमारा इंदौर भी धार्मिक पर्यटन का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है।
अहिंसा के महा-धाम: प्रमुख जैन तीर्थ
जैन धर्म के शाश्वत तीर्थ श्री सम्मेद शिखरजी (झारखंड), जहाँ 20 तीर्थंकरों ने निर्वाण प्राप्त किया, और गुजरात का श्री शत्रुंजय महातीर्थ (पालीताना) जैन आस्था के सबसे बड़े केंद्र हैं। गिरनार जी की कठिन चढ़ाई और राजस्थान का नाकोड़ा जी व राणकपुर अपनी अलौकिक शक्ति और शिल्प कला के लिए पूजनीय हैं।
इंदौर: धर्म और कला का अनूठा संगम
देशभर के तीर्थों की चर्चा के बीच, इंदौर का धार्मिक महत्व भी किसी से कम नहीं है। यहाँ के जैन मंदिर न केवल आस्था के केंद्र हैं, बल्कि वास्तुकला के बेजोड़ नमूने भी हैं:
* कांच मंदिर (Kanch Mandir): सेठ हुकुमचंद जी द्वारा निर्मित यह मंदिर पूरी दुनिया में अपनी तरह का एक अनूठा अजूबा है, जहाँ छत से लेकर फर्श तक, हर इंच कांच की बारीक नक्काशी से सजा है।
* श्री गोम्मटगिरी (Gommatgiri): पहाड़ी पर स्थित भगवान बाहुबली की 21 फुट ऊंची प्रतिमा और 24 चरण कमलों के दर्शन कर भक्त यहाँ परम शांति का अनुभव करते हैं।
* हिंगोरी व नशियाँ जी: इंदौर के सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक तीर्थों में शुमार ये स्थान समाज की धरोहर हैं।
* खजराना गणेश मंदिर: सर्व-धर्म समभाव का प्रतीक, जहाँ देश-विदेश से भक्त माथा टेकने आते हैं।
सनातन का गौरव: भव्य मंदिर
इनके साथ ही, अयोध्या का राम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और उज्जैन का महाकाल लोक भारत की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में उभरे हैं। दक्षिण में तिरुपति बालाजी और उत्तर में केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम में उमड़ती भीड़ यह बताती है कि भारत अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है।
(बॉक्स खबर – धर्म नगरी इंदौर के रत्न)
> 🏙️ इंदौर के प्रमुख जैन तीर्थ और मंदिर 🏙️
> * कांच मंदिर (इतवारिया बाजार) – अद्भुत कला का नमूना।
> * गोम्मटगिरी (एयरपोर्ट रोड) – भगवान बाहुबली की विशाल प्रतिमा।
> * श्री हिंगोरी तीर्थ – प्राचीन और चमत्कारिक।
> * नशियाँ जी – ऐतिहासिक महत्व।
> * पुष्पगिरी (सोनकच्छ – इंदौर के समीप) – आधुनिक तीर्थ।
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निष्कर्ष
चाहे सम्मेद शिखरजी की पवित्रता हो, महाकाल की भस्म आरती, या फिर इंदौर के कांच मंदिर की चमक—ये सभी स्थान मिलकर ‘श्रेष्ठ भारत’ की तस्वीर पेश करते हैं।
रिपोर्ट:
शैलेंद्र श्रीमाल
जिला अध्यक्ष, जैन पत्रकार परिषद, इंदौर
सदस्य, स्टेट प्रेस क्लब
‘खबर पर नजर’










