अधिकारियों ने बताया: 90% से अधिक भारतीय बच्चे अस्पतालों में जन्मे, 87% एक वर्षीय बच्चे पूरी तरह से टीकाकरण के साथ – NFHS-6

Over 90% of Indian babies born in hospitals, 87% of one-year-olds fully vaccinated: NFHS-6

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अधिकारियों ने बताया: 90% से अधिक भारतीय बच्चे अस्पतालों में जन्मे, 87% एक वर्षीय बच्चे पूरी तरह से टीकाकरण के साथ – NFHS-6

नई दिल्ली – (रिपोर्टर)

खबर का सार

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण NFHS-6 (2023-24) की ताजा रिपोर्ट में पता चला है कि भारत में 90% से अधिक बच्चे अस्पतालों में जन्म लेते हैं और 87% एक साल के बच्चे पूरी तरह से टीकाकरण कराए गए हैं। रिपोर्ट में यह भी संकेत मिला है कि बच्चों में कुपोषण की घटनाएं, जैसे स्टंटिंग और गंभीर कुपोषण, काफी कम हुई हैं। साथ ही, गर्भवती महिलाओं के लिए पोषण और सेवा स्तरों में सुधार हुआ है, जो एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

घटना का विस्तार

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 2023-24 में किया गया NFHS-6 सर्वेक्षण प्रकाशित किया, जिसमें स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न प्रमुख संकेतकों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत में लगभग 91% बच्चे अस्पतालों या होम सेन्टरों में स्वच्छ सुरक्षित वातावरण में जन्म लेते हैं। यह पिछले सर्वे की तुलना में एक महत्वपूर्ण उन्नति है। एक वर्ष के पूरी तरह से टीकाकृत बच्चों का प्रतिशत भी 87% पहुंच गया है, जिसमें पोलियो, मेज़ल्स, BCG और अन्य प्रमुख वैक्सीन शामिल हैं।

संबंधित बयान

स्वास्थ्य मंत्री ने इस प्रगति पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा, “यह हमारे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयासों का परिणाम है कि बच्चे सुरक्षित वातावरण में जन्म ले रहे हैं और समय पर टीकाकरण पा रहे हैं। हम लगातार गर्भवती महिलाओं के पोषण स्तर सुधारने एवं उनके लिए बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहे हैं।” विशेषज्ञों का कहना है कि इन सुधारों से बच्चों की सेहत में उल्लेखनीय सुधार होगा और कुपोषण की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण मिल सकेगा।

अतिरिक्त जानकारी और प्रभाव

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि स्टंटिंग (देखभाल से वृद्धि में कमी) का स्तर 25% से घटकर अब लगभग 20% तक आ गया है, जबकि गंभीर कुपोषण में भी कमी आई है। गर्भवती महिलाओं को बेहतर पोषण देने के लिए सरकार ने कई योजनाएं चलायी हैं, जिनमें आंगनवाड़ी सेवाएं, आयरन और फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन तथा स्वास्थ्य जांच शामिल हैं। ये सुधार ना केवल बाल स्वास्थ्य में फायदा पहुँचा रहे हैं, बल्कि भविष्य में स्वस्थ पीढ़ी के निर्माण में भी मददगार साबित होंगे। विशेषज्ञ कहते हैं कि इस तरह के आँकड़े भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव दर्शाते हैं, परंतु अभी भी कई ग्रामीण एवं पीछे छूटे क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है। सरकार ने इन्हें लक्षित करने और सुधारों को व्यापक बनाने का संकल्प लिया है।

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KPN News
Author: KPN News

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