बलूचिस्तान में 11 अगस्त को क्यों मनाया गया ‘जश्न-ए-आजादी’? जानें 1947 और 1948 का पूरा विवाद

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क्वेटा, बलूचिस्तान

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में 11 अगस्त को बलूच राष्ट्रवादी और अलगाववादी समूहों ने ‘जश्न-ए-आजादी’ के रूप में यह दिन मनाया। यह पाकिस्तान का आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस नहीं है। बलूच राष्ट्रवादी संगठनों के लिए 11 अगस्त ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व रखने वाला दिन है। उनका दावा है कि यह तारीख कलात की उस संप्रभुता की याद दिलाती है, जिसे वे 1948 में पाकिस्तान के साथ विलय के बाद खोई हुई स्वतंत्रता के रूप में देखते हैं।

इस वर्ष भी बलूच समूहों ने 11 अगस्त को विभिन्न गतिविधियों के जरिए अपनी राजनीतिक मांगों को सामने रखा। रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान में इस मौके पर प्रतिबंध और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने के दावे भी सामने आए। बलूच नेता मीर यार बलूच ने संचार सेवाओं में बाधा और सुरक्षा बलों की बढ़ी तैनाती का आरोप लगाया।

11 अगस्त का इतिहास क्या है?

11 अगस्त 1947 की तारीख कलात के इतिहास से जुड़ी है। ब्रिटिश शासन समाप्त होने के समय कलात के खान मीर अहमद यार खान ने अपनी अलग राजनीतिक स्थिति और संप्रभुता का दावा किया था। बलूच राष्ट्रवादी इसी घटनाक्रम को 11 अगस्त के महत्व का आधार मानते हैं।

इसके बाद पाकिस्तान और कलात के बीच संबंधों को लेकर विवाद बढ़ा। मार्च 1948 में खान ने पाकिस्तान के साथ विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। बलूच राष्ट्रवादी इस प्रक्रिया को दबाव में हुआ विलय या कब्जा बताते हैं, जबकि पाकिस्तान इसे वैध विलय मानता है।

इसी ऐतिहासिक मतभेद के कारण 11 अगस्त आज भी बलूच राष्ट्रवादी राजनीति का महत्वपूर्ण प्रतीक बना हुआ है। वहीं, पाकिस्तान सरकार और उसके आधिकारिक ढांचे में बलूचिस्तान देश का अभिन्न प्रांत है और 14 अगस्त ही स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इसलिए 11 अगस्त का ‘जश्न-ए-आजादी’ मुख्य रूप से बलूच राष्ट्रवादी आंदोलन की राजनीतिक अभिव्यक्ति है, न कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त किसी स्वतंत्र बलूचिस्तान की आधिकारिक राष्ट्रीय वर्षगांठ।

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Author: KPN News

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