मुंबई, महाराष्ट्र
हिंदी फिल्म संगीत का एक ऐसा दौर था, जब गाने सिर्फ फिल्म का हिस्सा नहीं होते थे, बल्कि दर्शकों की यादों का हिस्सा बन जाते थे। 90 के दशक के आसपास के कई रोमांटिक गीत आज भी उतने ही पसंद किए जाते हैं, जितने रिलीज के समय किए जाते थे। श्रीदेवी और ऋषि कपूर पर फिल्माया गया फिल्म ‘बंजारन’ का गाना ‘मेरे दिल की गलियों में’ भी इसी श्रेणी में आता है।
इस गीत की सबसे खास बात इसकी मधुर धुन, रोमांटिक बोल और अलका याग्निक की आवाज है। गीत को अलका याग्निक और सुरेश वाडेकर ने गाया था। इसका संगीत मशहूर संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने दिया था, जबकि गीत के बोल दिग्गज गीतकार आनंद बख्शी ने लिखे थे।
अलका याग्निक की आवाज का जादू
अलका याग्निक हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित प्लेबैक सिंगर्स में से एक रही हैं। अपने लंबे करियर में उन्होंने अलग-अलग भाषाओं और कई तरह की फिल्मों के लिए गीत रिकॉर्ड किए। उनकी आवाज में ऐसी मिठास थी, जो रोमांटिक गीतों को खास प्रभाव देती थी।
‘मेरे दिल की गलियों में’ में भी उनकी गायकी का वही अंदाज सुनाई देता है। आवाज की नरमी और शब्दों के अनुरूप भावनात्मक प्रस्तुति गाने को बेहद सहज और मधुर बनाती है। सुरेश वाडेकर के साथ उनकी जुगलबंदी गीत की खूबसूरती को और बढ़ाती है।
श्रीदेवी और ऋषि कपूर की शानदार केमिस्ट्री
फिल्म ‘बंजारन’ में श्रीदेवी और ऋषि कपूर मुख्य भूमिकाओं में थे। दोनों की जोड़ी को दर्शकों ने काफी पसंद किया और फिल्म के रोमांटिक दृश्यों में उनकी स्क्रीन केमिस्ट्री खास नजर आई।
‘मेरे दिल की गलियों में’ में भी दोनों कलाकारों का यही रोमांटिक अंदाज देखने को मिलता है। श्रीदेवी की अभिव्यक्ति और ऋषि कपूर की सहज अदाकारी गीत को पर्दे पर जीवंत बनाती है। यही कारण है कि गाना सिर्फ सुनने वाला ही नहीं, बल्कि देखने वाला अनुभव भी बन जाता है।
आनंद बख्शी के बोल और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत
इस गीत की एक और बड़ी खासियत इसके रचनाकार हैं। आनंद बख्शी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के उन गीतकारों में रहे हैं जिन्होंने सरल शब्दों में गहरी भावनाएं व्यक्त करने की कला में महारत हासिल की थी। दूसरी ओर लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की संगीत शैली ने गीत को एक याद रहने वाली धुन दी।
गाने में शब्दों और संगीत के बीच संतुलन साफ महसूस होता है। यही कारण है कि इसकी धुन लंबे समय बाद भी कानों में आसानी से बस जाती है।
‘बंजारन’ की कहानी थी पुनर्जन्म पर आधारित
फिल्म ‘बंजारन’ का निर्देशन हरमेश मल्होत्रा ने किया था। फिल्म की कहानी पुनर्जन्म के इर्द-गिर्द बुनी गई थी। इसमें श्रीदेवी और ऋषि कपूर के अलावा प्राण, कुलभूषण खरबंदा, गुलशन ग्रोवर, रजा मुराद और राकेश बेदी जैसे कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए।
फिल्म के संगीत में उस दौर की मेलोडी और रोमांस की झलक साफ दिखाई देती है। ‘मेरे दिल की गलियों में’ इसी संगीत विरासत का एक हिस्सा है।
आज भी क्यों सुनना पसंद करते हैं लोग?
समय बदल गया, संगीत सुनने के तरीके बदल गए और नई पीढ़ी के लिए नए गाने आ गए, लेकिन पुराने मेलोडी गीतों की लोकप्रियता खत्म नहीं हुई। इसकी वजह उनके शब्द, धुन और आवाज का स्थायी असर है।
‘मेरे दिल की गलियों में’ में श्रीदेवी और ऋषि कपूर की जोड़ी, अलका याग्निक और सुरेश वाडेकर की आवाज, आनंद बख्शी के बोल और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत एक साथ नजर आता है। यही मेल इसे पुराने रोमांटिक हिंदी गीतों में खास बनाता है।
आज भी जब 90 के दशक के सुरीले बॉलीवुड गानों की चर्चा होती है, तो यह गीत उन यादगार धुनों में शामिल हो जाता है जिन्हें एक बार सुनने के बाद दोबारा चलाने का मन करता है।










