नई दिल्ली, दिल्ली
वंदे मातरम् के पूर्ण गायन को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी अपने आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो छंदों का ही गायन करेगी। कांग्रेस कार्यसमिति ने अपने पुराने 1937 के प्रस्ताव को आधार बनाते हुए यह रुख दोहराया है।
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कार्यसमिति की बैठक के बाद कहा कि पार्टी 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा तय किए गए फैसले का पालन करेगी। उनका कहना है कि उस समय महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और अन्य वरिष्ठ नेताओं की सहमति से वंदे मातरम् के शुरुआती दो छंदों के गायन को लेकर फैसला हुआ था।
यह विवाद 15 अगस्त के कांग्रेस कार्यक्रम के बाद तेज हुआ था। उस कार्यक्रम में वंदे मातरम् के सभी छंद गाए गए थे। इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस पर सवाल खड़े किए और पार्टी के भीतर इसको लेकर विरोधाभास का आरोप लगाया। कांग्रेस ने अब स्पष्ट कर दिया है कि उसके कार्यक्रमों में 1937 के प्रस्ताव के अनुरूप केवल पहले दो छंद गाए जाएंगे।
चार घंटे चली कार्यसमिति की बैठक
कांग्रेस कार्यसमिति की करीब चार घंटे चली बैठक में वंदे मातरम् के अलावा पेपर लीक, बेरोजगारी, परिसीमन, महिला आरक्षण और राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।
कांग्रेस ने युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर देशभर में अभियान चलाने का फैसला किया है। पार्टी के अनुसार, करीब 800 छोटे-बड़े शहरों में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था और रोजगार से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाना है।
बैठक में राहुल गांधी ने भी युवाओं की समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने पेपर लीक और रोजगार के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की बात कही।
परिसीमन पर भी कांग्रेस का विरोध
कांग्रेस कार्यसमिति ने लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्तावित परिसीमन को लेकर भी अपना विरोध दोहराया है। पार्टी का कहना है कि अगले 25 वर्षों तक मौजूदा 543 लोकसभा सीटों को बरकरार रखा जाना चाहिए और इन्हीं सीटों के आधार पर महिला आरक्षण लागू किया जाना चाहिए।
बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
कांग्रेस के फैसले पर भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने राजनीतिक फैसले को राष्ट्रीय महत्व के विषयों से ऊपर रख रही है।
भाजपा का कहना है कि वंदे मातरम् देश की राष्ट्रीय भावना से जुड़ा है और इसके पूर्ण गायन को लेकर कांग्रेस का रुख दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि वह किसी नए नियम के बजाय 1937 में तय ऐतिहासिक व्यवस्था का पालन कर रही है।










