लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश का लखीमपुर खीरी जिला जल्द ही एक बड़ी औद्योगिक परियोजना के कारण देशभर में चर्चा का केंद्र बन सकता है। यहां भारत का पहला बड़े पैमाने का बायो-पॉलिमर प्लांट तैयार किया जा रहा है, जिसके अक्टूबर तक शुरू होने की उम्मीद है। करीब 3,080 करोड़ रुपये के निवेश से बन रहे इस प्लांट में गन्ने से पीएलए आधारित बायोप्लास्टिक तैयार किया जाएगा।
यह परियोजना कृषि और आधुनिक उद्योग के मेल का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है। प्लांट में गन्ने से पहले चीनी तैयार की जाएगी और उसके बाद निर्धारित औद्योगिक प्रक्रिया के माध्यम से पीएलए यानी पॉलीलैक्टिक एसिड आधारित बायोप्लास्टिक का उत्पादन किया जाएगा।
खीरी के जिला मजिस्ट्रेट अंजनी कुमार सिंह ने गुरुवार को निर्माणाधीन परियोजना का निरीक्षण किया। उन्होंने प्लांट के निर्माण कार्य और अक्टूबर में प्रस्तावित शुरुआत से पहले तैयारियों की समीक्षा की। अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान प्लांट के लेआउट और उत्पादन प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों का प्रस्तुतीकरण दिया।
जिला मजिस्ट्रेट ने उत्पादन व्यवस्था और तकनीकी वर्कफ्लो के बारे में भी जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना में आधुनिक औद्योगिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि बड़े स्तर पर बायोपॉलिमर का उत्पादन किया जा सके।
इस प्लांट की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका जीरो लिक्विड डिस्चार्ज यानी ZLD सिस्टम है। इस तकनीक के जरिए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि उत्पादन प्रक्रिया से निकलने वाला हानिकारक तरल अपशिष्ट सीधे नदियों और नालों में न जाए। इससे पर्यावरण पर औद्योगिक गतिविधियों के संभावित प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
पीएलए बायोप्लास्टिक को सामान्य प्लास्टिक के विकल्प के रूप में देखा जाता है। गन्ने जैसी कृषि उपज से बायोपॉलिमर तैयार करने की यह परियोजना भविष्य में पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा दे सकती है।
लखीमपुर खीरी में बनने वाला यह प्लांट स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। परियोजना के शुरू होने से औद्योगिक गतिविधियों के साथ रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। साथ ही गन्ना आधारित उद्योगों को नई तकनीक और नए बाजार मिल सकते हैं।
3,080 करोड़ रुपये के बड़े निवेश के साथ तैयार हो रही यह परियोजना उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। यदि प्लांट अक्टूबर में तय समय पर चालू होता है, तो यह भारत के बायोपॉलिमर और बायोप्लास्टिक उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।










