रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिश में अमेरिका सक्रिय, पुतिन-जेलेंस्की से मिले दूत; डोनबास और नाटो पर नहीं बनी बात

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मॉस्को, रूस

रूस और यूक्रेन के बीच करीब साढ़े चार साल से जारी युद्ध को खत्म कराने के लिए अमेरिका की कूटनीतिक पहल तेज हो गई है। इसी सिलसिले में अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने पहले मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की और इसके बाद रविवार को कीव पहुंचकर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ बातचीत की। दोनों बैठकों को सकारात्मक और संतोषजनक बताया गया है, लेकिन युद्ध समाप्त करने की मुख्य शर्तों पर गतिरोध अभी भी कायम है।

मॉस्को में पुतिन के साथ अमेरिकी दूतों की करीब तीन घंटे तक बातचीत हुई। रूसी राष्ट्रपति के विदेशी मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने बैठक के बाद कहा कि चर्चा सकारात्मक और लाभदायक रही। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बातचीत से रूस के युद्ध संबंधी लक्ष्यों में कोई बदलाव नहीं आया है।

रूस की ओर से डोनबास क्षेत्र पर नियंत्रण और यूक्रेन के नाटो से दूर रहने की मांग को महत्वपूर्ण शर्त माना जा रहा है। इन मुद्दों पर रूस अपने रुख पर कायम है। यही वजह है कि बातचीत के सकारात्मक माहौल के बावजूद किसी अंतिम समझौते की दिशा में तत्काल सफलता नहीं मिल सकी है।

मॉस्को वार्ता के बाद विटकॉफ और कुशनर रविवार को ट्रेन से कीव पहुंचे। यहां उन्होंने जेलेंस्की और यूक्रेन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत की। जेलेंस्की ने अमेरिकी दूतों के पहुंचने से पहले कहा था कि यूक्रेन शांति समझौते के साथ भविष्य के लिए सुरक्षा गारंटी भी चाहता है।

यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि युद्ध समाप्त होने के बाद भी उसे रूस की ओर से संभावित सुरक्षा खतरे की चिंता बनी हुई है। हालांकि, बातचीत के इस दौर में जेलेंस्की ने सुरक्षा गारंटी के अलावा किसी पुरानी शर्त का प्रमुख रूप से उल्लेख नहीं किया।

एक वरिष्ठ यूक्रेनी अधिकारी के अनुसार, अमेरिकी दूतों की जेलेंस्की और वरिष्ठ यूक्रेनी अधिकारियों के साथ दो दौर की बातचीत होनी थी। इसके बाद फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक प्रस्तावित थी। इससे यह संकेत मिलता है कि संभावित शांति प्रक्रिया में यूरोपीय देशों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अमेरिकी दूतों की यह पहली कीव यात्रा है। उनकी यात्रा ऐसे समय हुई है जब पिछले कुछ महीनों में रूस और यूक्रेन के बीच सैन्य हमले काफी बढ़े हैं। पिछले छह महीनों में यूक्रेन ने ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए रूस को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है। इसके जवाब में रूस ने पिछले दो महीनों में कीव और अन्य यूक्रेनी शहरों पर हमले तेज किए हैं।

रूस के जेट इंजन चालित ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों ने यूक्रेन के कई हिस्सों में नुकसान पहुंचाया है। लगातार बढ़ते सैन्य दबाव के बीच दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना फिर मजबूत हुई है।

मॉस्को और कीव में शांति के संकेत भी दिखाई दिए हैं और दोनों जगह किसी बड़े हमले की जानकारी नहीं है। हालांकि, काला सागर में यूक्रेन के एक जहाज पर रूस की ओर से हमला किए जाने की खबर सामने आई है। इससे स्पष्ट है कि सैन्य तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

अमेरिकी मध्यस्थता ने रूस और यूक्रेन के बीच संवाद को नई गति जरूर दी है। पुतिन और जेलेंस्की के साथ अमेरिकी दूतों की बातचीत को इसी दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। लेकिन स्थायी शांति समझौते के लिए दोनों पक्षों को डोनबास, यूक्रेन की नाटो सदस्यता और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था जैसे कठिन मुद्दों पर सहमति बनानी होगी।

फिलहाल बातचीत का माहौल पहले की तुलना में सकारात्मक दिखाई दे रहा है, लेकिन अंतिम शांति समझौते तक पहुंचने के लिए कई दौर की कूटनीतिक बातचीत अभी बाकी है।

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Author: KPN News

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