नई दिल्ली, दिल्ली
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए शुक्रवार को नई दिल्ली पहुंचे। राजधानी में होने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में दुनिया की बदलती भू-राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों के बीच BRICS देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत यात्रा के दौरान पेजेशकियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे।
तेहरान से रवाना होने से पहले ईरानी राष्ट्रपति ने BRICS की भूमिका और संगठन के उद्देश्यों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि BRICS का एक प्रमुख उद्देश्य दुनिया में एकतरफावाद का मुकाबला करना है। उनके बयान को वैश्विक स्तर पर बहुध्रुवीय व्यवस्था और विकासशील देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की ईरान की नीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
पेजेशकियान ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में अमेरिकी डॉलर की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि BRICS देशों के बीच आपसी निवेश और वित्तीय सहयोग बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि सदस्य देशों के बीच लेन-देन में डॉलर पर निर्भरता को कम किया जा सके। उन्होंने BRICS के भीतर वित्तीय संस्थागत सहयोग को भी इस दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
ईरानी राष्ट्रपति ने भारत और ईरान के सदियों पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच मौजूद समानताओं का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। भारत और ईरान के संबंधों में व्यापार, ऊर्जा, परिवहन, बंदरगाह और क्षेत्रीय संपर्क जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
नई दिल्ली में होने वाली बैठकों के दौरान इन विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है। पेजेशकियान की अन्य BRICS सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात का कार्यक्रम भी है।
BRICS के विस्तार के बाद समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं। इस विस्तार से संगठन का वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक महत्व बढ़ा है।
सम्मेलन के दौरान आर्थिक विकास, व्यापार, वित्तीय सहयोग, वैश्विक शासन में सुधार और ग्लोबल साउथ के हितों जैसे मुद्दे प्रमुख चर्चा का हिस्सा हो सकते हैं। ऐसे में पेजेशकियान की भारत यात्रा दोनों देशों के संबंधों के साथ-साथ BRICS के भीतर ईरान की भूमिका के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है।




