कोलकाता, पश्चिम बंगाल। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के लिए पिछले 72 घंटे बेहद चुनौतीपूर्ण रहे। पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर विवाद से शुरू हुआ संकट नंदीग्राम में उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने और रेजीनगर में उम्मीदवार के असमंजस तक पहुंच गया। हालांकि, रेजीनगर के उम्मीदवार ने बाद में अपना फैसला वापस लेकर पार्टी को थोड़ी राहत दी।
पहले दिन फ्रीज हुआ नाम और निशान
टीएमसी के भीतर गुटों के बीच विवाद के बाद चुनाव आयोग ने पार्टी के पारंपरिक नाम और फूल वाले चुनाव चिन्ह को फ्रीज कर दिया। इससे पार्टी की चुनावी पहचान को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया।
दूसरे दिन मिला नया नाम और चुनाव चिन्ह
इसके बाद ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉलर’ चुनाव चिन्ह दिया गया। वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ निशान मिला।
इसी दिन नंदीग्राम में टीएमसी उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन किया। ममता ने कांग्रेस को बहन पार्टी बताते हुए समर्थन की घोषणा की।
इसके बाद मिलन प्रधान की गिरफ्तारी की खबर सामने आई। टीएमसी की ओर से इसे राजनीतिक कार्रवाई बताते हुए बीजेपी सरकार पर निशाना साधा गया।
तीसरे दिन रेजीनगर में बदला फैसला
रेजीनगर में टीएमसी उम्मीदवार और पूर्व विधायक रबीउल आलम चौधरी ने पहले नामांकन वापस लेने की बात कही। उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह की कमी, पुलिस कार्रवाई और नए चुनाव चिन्ह को मतदाताओं तक पहुंचाने में आने वाली परेशानी का हवाला दिया।
हालांकि, करीब डेढ़ घंटे बाद चौधरी ने अपना फैसला वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि वह चुनाव लड़ेंगे और पार्टी नेतृत्व के निर्देशों का पालन करेंगे। उनके अनुसार, ममता बनर्जी के निर्देश के बाद उन्होंने अपनी उम्मीदवारी बरकरार रखने का फैसला किया।
पिछले 72 घंटों में सामने आए घटनाक्रम ने टीएमसी के सामने संगठनात्मक एकजुटता और चुनावी रणनीति से जुड़ी चुनौती को बढ़ा दिया है। रेजीनगर उम्मीदवार का वापस चुनाव मैदान में आना पार्टी के लिए इस घटनाक्रम में एक राहत जरूर लेकर आया।









