शिमला, हिमाचल प्रदेश। हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में कर्मचारियों की कमी और बढ़ते कार्यभार को लेकर गैर शिक्षक कर्मचारी महासंघ ने मोर्चा खोला है। महासंघ ने विभाग में खाली पड़े करीब 1000 जेओए (आईटी) और लिपिक पदों को शीघ्र भरने की मांग की है। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों की कमी का सीधा असर मौजूदा स्टाफ के कामकाज पर पड़ रहा है।
महासंघ के अनुसार, सीबीएसई स्कूलों के साथ-साथ खंड प्रारंभिक शिक्षा कार्यालयों और अन्य कार्यालयों में भी मिनिस्ट्रियल स्टाफ की कमी है। इसके कारण कर्मचारियों को निर्धारित काम के अलावा अतिरिक्त जिम्मेदारियां संभालनी पड़ रही हैं।
स्कूल शिक्षा निदेशालय में हुई बैठक
गैर शिक्षक कर्मचारी महासंघ की बैठक शनिवार को स्कूल शिक्षा निदेशालय के सभागार में हुई। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से जिला प्रधान, महासचिव और राज्य कार्यकारिणी के 70 से अधिक पदाधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक के बाद महासंघ के प्रतिनिधियों ने निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली समेत विभाग के अन्य अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों को उनके सामने रखा गया।
12 सूत्रीय मांगपत्र में कई मुद्दे
महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष त्रिलोक ठाकुर ने निदेशक को 12 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। इसमें सबसे प्रमुख मांग रिक्त जेओए (आईटी) और लिपिक पदों को जल्द भरने की रही।
त्रिलोक ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों से आए पदाधिकारियों ने कर्मचारियों की समस्याओं को मजबूती से विभाग के सामने रखा है। उनका कहना है कि लंबे समय से कर्मचारियों की कमी के कारण काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
बैठक के दौरान विभागीय अधिकारियों ने कर्मचारियों की मांगों को सुना और विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक माहौल में चर्चा की। महासंघ के अनुसार, विभाग की ओर से मांगों पर उचित स्तर पर विचार करने और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
महासंघ ने उम्मीद जताई कि कर्मचारियों की लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लिया जाएगा। संगठन का कहना है कि रिक्त पदों पर भर्ती होने से शिक्षा विभाग के कार्यालयों में काम का दबाव कम होगा और कर्मचारियों को राहत मिलेगी।









