नई दिल्ली, दिल्ली
कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने अमेरिका की ओर से भारत पर प्रस्तावित भारी शुल्क को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने केंद्र सरकार से अमेरिकी शुल्क नीति का दृढ़ता से विरोध करने और देश के आर्थिक हितों तथा संप्रभुता की रक्षा करने की अपील की है। शर्मा ने कहा कि जब तक दोनों देशों के बीच संबंधित व्यापारिक और रणनीतिक मुद्दों का समाधान नहीं होता, भारत को किसी भी ऐसे व्यापार समझौते से बचना चाहिए जो बराबरी पर आधारित न हो।
आनंद शर्मा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम, 2026’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कानून भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाल सकता है। उनके अनुसार, कानून अमेरिका को रूस और ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाने का अधिकार देता है।
उन्होंने कहा कि भारत रूसी कच्चे तेल का बड़ा आयातक है और इसलिए इस तरह के शुल्क का सीधा असर देश की ऊर्जा लागत और व्यापार पर पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों और आपूर्ति में होने वाला बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
शर्मा ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। ऊर्जा बाजार में किसी भी बड़े व्यवधान से कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
कांग्रेस नेता ने अमेरिकी नीति को भेदभावपूर्ण बताया। उन्होंने नाटो के कुछ सदस्य देशों को मिलने वाली कथित छूट का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि भारत जैसे रणनीतिक साझेदार को अलग तरीके से क्यों देखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए किसी भी दबाव में असमान व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए।









