नई दिल्ली, दिल्ली। जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका को सात दिन जेल में रहने के बाद एसईएम कोर्ट से रिहाई मिल गई है। दोनों ने अदालत के सामने शांति भंग नहीं करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का लिखित आश्वासन दिया। अदालत ने उन्हें 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और इतने ही मूल्य के जमानती मुचलके की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया।
अदालत के समक्ष दोनों ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका और विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (एसईएम) न्यायालय पर पूरा विश्वास है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि वे आगे ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिससे सार्वजनिक शांति भंग हो या कानून-व्यवस्था प्रभावित हो।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर रखी गई शर्त
अदालत के सामने दिए गए लिखित आश्वासन के अनुसार, जब तक जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन को प्रतिबंधित करने वाला आदेश कानून के अनुसार लागू रहेगा, तब तक दोनों वहां प्रदर्शन के लिए कोई आह्वान नहीं करेंगे। यदि भविष्य में कोई प्रदर्शन किया जाता है, तो उसे संविधान के दायरे में रहकर आयोजित किया जाएगा।
दोनों को सार्वजनिक शांति बनाए रखने और मुचलके की सभी शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि रिहाई का यह आदेश केवल हिरासत से मुक्त करने के लिए है। इससे मामले की कार्यवाही समाप्त नहीं हुई है और जांच कानून के अनुसार जारी रहेगी।
23 अक्टूबर को दोबारा अदालत में होना होगा पेश
अदालत ने सौरव दास, आशुतोष रांका और उनके जमानतदारों को 23 अक्टूबर को दोपहर तीन बजे अगली सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। दोनों को प्रत्येक निर्धारित तारीख पर अदालत में पेश होना होगा और अपने लिखित आश्वासनों का पालन करना होगा।
अदालत के अनुसार, दोनों की ओर से दिए गए मुचलकों और लिखित आश्वासनों से फिलहाल शांति तथा सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक एहतियाती उपाय सुनिश्चित किए जा सकते हैं। इसी आधार पर इस स्तर पर उन्हें आगे न्यायिक हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं मानी गई।
हालांकि, दोनों की रिहाई का अर्थ मामले में पूरी तरह राहत मिलना नहीं है। आगे की कार्रवाई अदालत में होने वाली सुनवाई और कानून के अनुसार जारी जांच पर निर्भर करेगी।









