जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने हाल ही में कश्मीर मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार उनकी मदद नहीं कर सकती और पड़ोसी देश पाकिस्तान हर जगह कश्मीर का मुद्दा उठा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए जम्मू-कश्मीर का सहारा ले रहा है, जबकि 26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरि सिंह ने पूरे जम्मू-कश्मीर सहित PoK को भारत में विलय किया था।
पाकिस्तान का शुरूआती नजरिया
पाकिस्तान के गठन के शुरुआती विचारों में कश्मीर शामिल नहीं था। 1930 में मुस्लिम लीग के अधिवेशन में मोहम्मद इकबाल ने केवल पंजाब, उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत, सिंध और बलूचिस्तान को मिलाकर नया राज्य बनाने की बात कही थी। उनकी बातों में कश्मीर का कहीं जिक्र नहीं था। इसके बाद 1937 में मोहम्मद अली जिन्ना के साथ पत्राचार के दौरान भी इस राजनीतिक दर्शन में कश्मीर का सवाल सामने नहीं आया।
अलगाववाद की बढ़ती आवाज़
पाकिस्तान बनने के बाद जिन्ना ने बंगाली भाषी समुदाय को उर्दू और अरबी के उपयोग के लिए मजबूर किया, जिसके खिलाफ संघर्ष के बाद 1971 में पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर बांग्लादेश बना। आज भी पाकिस्तान के अंदर अलगाववाद कायम है, जैसे सिंध में सिंधुदेश की मांग और बलूचिस्तान में आजादी की आवाजें। बलूच नेता आरोप लगाते हैं कि उनके संसाधनों का दोहन और सांस्कृतिक दबाव उनके विरुद्ध किया जा रहा है।
PoK में बढ़ती नाराजगी
खैबर पख्तूनख्वा प्रांत भी आतंकवाद और राजनीतिक अस्थिरता के चपेट में है। वहाँ के पख्तून भी लंबे समय से स्व-शासन या स्वतंत्र पख्तूनिस्तान की मांग करते रहे हैं। PoK में नागरिक अधिकारों और प्रशासन में सेना की दखलंदाजी के कारण नाराजगी बढ़ी है। 2023 से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन इस असंतोष को दर्शाते हैं।
विरोध के कारण और JAAC की भूमिका
PoK के लोग केवल आर्थिक मदद के लिए नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व और शासन के संकट के चलते प्रदर्शन कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) इस आंदोलन में मुख्य भूमिका निभा रही है। हाल की राजनीतिक असहमति में 12 आरक्षित विधानसभा सीटों का सवाल भी शामिल है, जिनके कारण स्थानीय सरकार प्रभावित होती है। JAAC इन सीटों को खत्म या बदलने की मांग कर रही है।
बेरोजगारी और बजट में कमी
PoK में होते हुए भी स्थानीय सरकार को कई महत्वपूर्ण फैसलों का अधिकार नहीं मिला है। 2018 के संशोधन के बाद भी प्रशासनिक नियंत्रण पाकिस्तान सरकार के पास है। विकास के लिए आवंटित बजट घटकर 63 अरब रुपये रह गया है, जबकि पिछली संख्या 75 अरब रुपये थी। रोजगार की दर कम है, महिलाओं में बेरोजगारी 23% और युवाओं में 27% है।
सुरक्षा, मौतें और भारत की प्रतिक्रिया
PoK में सुरक्षा बलों की कार्रवाई और स्थानीय लोगों की मौतों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। 2023 के जून से अब तक लगभग 90 लोग मारे जा चुके हैं। कुछ लोग भारतीय तिरंगा लहराकर मदद मांग चुके हैं। भारत ने 1994 के संसद प्रस्ताव को याद दिलाया है जिसमें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान पर अपने दावे दोहराए थे।
मुख्य तथ्य
- 26 अक्टूबर 1947 को PoK सहित जम्मू-कश्मीर भारत में शामिल हुआ।
- PoK में 2023 से शुरू हुए विरोधों में JAAC प्रमुख है।
- PoK में बेरोजगारी दर 11%, महिलाओं में 23%, युवाओं में 27% है।
- Jammu-kashmir के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला ने पाकिस्तान की रणनीति पर सवाल उठाए।









