पुरुषों की लड़ाई में मारी जा रही हैं महिलाएं! हर 4 में 1 महिला मौत; यूएन रिपोर्ट

पुरुषों की लड़ाई में मारी जा रही हैं महिलाएं! हर 4 में 1 महिला मौत; यूएन रिपोर्ट

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विश्व में युद्ध और संघर्षों के बढ़ते प्रभाव से महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि युद्ध के कारण मारे गए हर चार आम लोगों में से एक महिला या लड़की होती है। यह स्थिति 2025 की है जब युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं के खिलाफ हिंसा और अन्य चुनौतियां बढ़ी हैं।

युद्ध के दौरान महिलाओं को हो रही भयानक समस्याएं

संयुक्त राष्ट्र महासचिव की “महिला, शांति और सुरक्षा” रिपोर्ट 26 अक्टूबर को जारी की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि 2025 में युद्ध एवं संघर्षों में 37,000 से अधिक आम लोग मारे गए, जिनमें हर दिन कम से कम 25 महिलाएं और लड़कियां शिकार बनीं। युद्ध प्रभावित इलाकों के आस-पास रहने वाली महिलाओं की संख्या 1990 के बाद सबसे अधिक दर्ज की गई है।

रिपोर्ट में सैन्य खर्चों में वृद्धि के साथ यौन हिंसा के मामलों में चार गुना वृद्धि का भी जिक्र है। युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाली लगभग 17 करोड़ महिलाएं और लड़कियां गरीबी में जी रही हैं, जिनका रोजाना खर्च तीन डॉलर से भी कम है। इस बीच, महिलाओं को बिना वेतन वाले घरेलू कार्यों और परिवार की देखभाल में पुरुषों की तुलना में पांच गुना अधिक समय लगाना पड़ता है।

संयुक्त राष्ट्र महिला के कार्यकारी निदेशक सीमा बाहौस ने कहा कि पिछले दशकों के मुकाबले आज युद्ध में महिलाओं और लड़कियों की संख्या सबसे ज्यादा है। उन्होंने नए सैन्य तकनीकों जैसे ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के खतरे पर भी चिंता जताई, जो घनी आबादी वाले इलाकों में नागरिकों के लिए खतरा बढ़ा रहे हैं।

शांति वार्ताओं में महिलाओं की भूमिका

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि शांति वार्ता में महिलाओं की भागीदारी अत्यंत कम होकर सिर्फ 5 प्रतिशत रह गई है, जो 2024 में 7 प्रतिशत थी। इसके विपरीत, 2025 में सैन्य खर्च 2.9 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गया, जो एक रिकॉर्ड है। युद्ध प्रभावित इलाकों में काम कर रही महिला संगठनों को भी फंडिंग की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।

ऐसे लगभग 40 प्रतिशत महिला संगठन आशंकित हैं कि अगले एक साल में उन्हें अपने काम को रोकना पड़ सकता है। ये संगठन यौन हिंसा की शिकार महिलाओं की मदद करने और युद्ध प्रभावित जगहों पर शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा बेहतर करने, अंतरराष्ट्रीय कानूनों को सख्ती से लागू करने और महिला नेतृत्व वाले शांति प्रयासों के निरंतर फंडिंग की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को शांति परिषदों में प्रभावी भागीदारी मिली बिना शांति प्रयासों की सफलता सुनिश्चित नहीं की जा सकती।

रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि महिलाओं और लड़कियों के ऊपर पड़ने वाला युद्ध का बोझ तभी घट सकता है जब वे शांति स्थापना के निर्णयों में सक्रिय रूप से शामिल होंगी। यह रिपोर्ट दुनिया भर में युद्ध प्रभावित महिलाओं की स्थितियों को समझने और सुधार की दिशा में कदम उठाने की महत्वपूर्ण चेतावनी है।

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KPN News
Author: KPN News

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