शिलाई, सिरमौर, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में खनन के दौरान हुए बड़े हादसे में तीन लोगों की जान चली गई। शिलाई क्षेत्र के कफोटा के पास तिलोरधार में मंगलवार दोपहर बाद खदान में अचानक भारी भूस्खलन हुआ। चट्टानों और मलबे की चपेट में आने से तीन लोग दब गए थे। सूचना मिलने के बाद प्रशासन, पुलिस और राहत-बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर अभियान शुरू किया।
काफी कठिन परिस्थितियों के बीच राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF ने करीब 10 घंटे तक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। स्थानीय पुलिस और ग्रामीणों ने भी अभियान में सहयोग किया। आखिरकार मलबे के नीचे दबे तीनों लोगों के शव बरामद कर लिए गए। हादसे में दो वाहन और एक एलएनटी मशीन भी क्षतिग्रस्त हुई है।
रेस्क्यू के दौरान सबसे बड़ी चुनौती लगातार बदलती पहाड़ी परिस्थितियां और मलबे का जोखिम रहा। बारिश के कारण जमीन और चट्टानों के खिसकने का खतरा बना हुआ था। मौसम में कुछ राहत मिलने के बाद बचाव कार्य में तेजी लाई गई।
मृतकों में टिपर चालक अनिल कुमार, निवासी बड़वास, और मजदूर धन सिंह, निवासी नगर पालिका बेदकोट, जिला कंचनपुर, नेपाल की पहचान हुई है। तीसरे मृतक की पहचान संबंधी जानकारी अभी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए सिरमौर की उपायुक्त प्रियंका वर्मा और शिलाई के एसडीएम जसपाल समेत कई प्रशासनिक अधिकारी और आपदा प्रबंधन से जुड़े कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों ने बचाव कार्य की निगरानी की और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए।
बरसात में खनन पर उठे सवाल
यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब हिमाचल प्रदेश में मानसून के कारण कई पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में खनन क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों और मशीन ऑपरेटरों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सिरमौर में खनन गतिविधियों और सुरक्षा मानकों की निगरानी को लेकर प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। खासकर ऐसे इलाकों में, जहां भारी बारिश के कारण जमीन के खिसकने की आशंका बनी रहती है।
तीनों शव बरामद होने के बाद राहत अभियान पूरा कर लिया गया है। अब हादसे के कारणों और खनन स्थल पर सुरक्षा प्रबंधों की स्थिति को लेकर आगे की कार्रवाई पर निगाहें रहेंगी।










