पीएम मोदी का शीर्ष अधिकारियों को संदेश, नीति निर्माण में युवाओं और विश्वविद्यालयों को दें बड़ी भूमिका

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नई दिल्ली, दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को भारत सरकार के शीर्ष नौकरशाहों से युवाओं और विश्वविद्यालयों के साथ जुड़ाव बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश की नीति निर्माण प्रक्रिया में नए विचार, नवीन सोच और व्यापक दृष्टिकोण लाने के लिए सरकारी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों और युवा वर्ग के बीच बेहतर संवाद आवश्यक है।

लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर भारत सरकार के सचिवों के साथ तीसरी उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को देश के भविष्य को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक सोच अपनाने की सलाह दी। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मोदी ने प्रशासनिक व्यवस्था में नए विचारों और आधुनिक दृष्टिकोण को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयों और युवाओं के साथ व्यापक जुड़ाव से नए और अनोखे विचार सामने आ सकते हैं। उनका मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों में हो रहे शोध, नवाचार और युवा पीढ़ी की सोच को सरकारी नीति निर्माण से जोड़ने पर बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के प्रभावी उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी कामकाज और निर्णय प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना जरूरी है, लेकिन इसके साथ मानवीय हस्तक्षेप और निर्णय लेने की जिम्मेदारी को बनाए रखना भी आवश्यक है। एआई के उपयोग को प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने के साधन के रूप में देखा जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने डाटा को राष्ट्रीय संपत्ति बताया और कहा कि इसके बेहतर प्रबंधन तथा प्रभावी उपयोग के लिए नई व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि अलग-अलग उद्देश्यों के लिए एकत्र किए जाने वाले डाटा और उसके प्रबंधन के तरीके अलग हो सकते हैं। ऐसे में एक प्रभावी समाधान की आवश्यकता है, जिससे उपलब्ध डाटा का अधिकतम उपयोग देश के विकास और बेहतर नीति निर्माण में किया जा सके।

पीएम मोदी ने विभिन्न सरकारी विभागों और टीमों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग इकाइयों का बिना समन्वय के काम करना केवल संगठनात्मक समस्या नहीं है, बल्कि यह सोच और कार्य संस्कृति का भी विषय है। अधिकारियों को अपनेपन और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना के साथ काम करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी और पश्चिम एशिया संकट के दौरान विभिन्न विभागों के बीच हुए प्रभावी समन्वय का उदाहरण देते हुए कहा कि संकट के समय दिखाई देने वाली सामूहिक कार्यशैली सरकार की नियमित कार्य संस्कृति का हिस्सा बननी चाहिए।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने अधिकारियों के बीच अनौपचारिक बातचीत और टीम भावना को बढ़ावा देने की जरूरत भी बताई। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि वे अपने जूनियर सहयोगियों के साथ अधिक व्यक्तिगत और सहज संवाद विकसित करें तथा विभिन्न कैडरों और विभागों के बीच मजबूत पेशेवर नेटवर्क तैयार करें।

प्रधानमंत्री मोदी ने देश के रक्षा उद्योग को और मजबूत करने तथा वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने रक्षा क्षेत्र के लिए नए और नवोन्मेषी पाठ्यक्रम विकसित करने और मानव संसाधन को मजबूत बनाने की जरूरत बताई। बैठक में सचिवों ने सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं और उनके प्रभावी क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।

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Author: KPN News

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