चंबा, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के रेटा गांव की धाविका सीमा ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को कांस्य पदक दिलाया। सीमा ने 10,000 मीटर दौड़ के फाइनल में तीसरा स्थान हासिल किया। उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही क्योंकि दौड़ के निर्णायक चरण में उनका जूता फट गया था।
जूता फटने से सीमा की रफ्तार प्रभावित हुई और उनकी लय भी टूट गई। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। पदक की दौड़ में बनी रहीं और अंत में तीसरे स्थान पर रहते हुए फिनिश लाइन पार की।
वर्षों की मेहनत का मिला फल
सीमा का एथलेटिक्स सफर चंबा के रेटा गांव से शुरू हुआ। पहाड़ी इलाकों में मौजूद पगडंडियों और ग्रामीण रास्तों पर दौड़कर उन्होंने अभ्यास किया। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में लगातार प्रशिक्षण ने उनकी सहनशक्ति और फिटनेस को मजबूत किया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने और एशियाई खेलों में पदक जीतने तक का उनका सफर वर्षों की मेहनत का परिणाम है।
फाइनल में लगातार बनी रहीं मजबूत
10,000 मीटर जैसी लंबी दूरी की दौड़ में धावकों को लंबे समय तक अपनी गति और ऊर्जा पर नियंत्रण रखना पड़ता है। सीमा ने फाइनल में भी इसी रणनीति के साथ दौड़ जारी रखी और शीर्ष धाविकाओं के साथ बनी रहीं।
अंतिम राउंड में जब पदक की तस्वीर साफ होने लगी, तब सीमा शीर्ष तीन में थीं। इसी दौरान उनका जूता फट गया। यह उनके लिए बड़ा झटका था, क्योंकि दौड़ के उस चरण में गति बनाए रखना बेहद जरूरी था।
लेकिन सीमा ने मुश्किल परिस्थिति को अपने प्रदर्शन पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने दौड़ जारी रखी और कांस्य पदक हासिल कर लिया।
चंबा की बेटी ने बढ़ाया देश का मान
सीमा की सफलता से चंबा जिले में खुशी का माहौल है। एक छोटे से गांव से निकलकर एशियाई खेलों जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए पदक जीतना उनके संघर्ष और समर्पण को दर्शाता है।
सीमा की कहानी इस बात का उदाहरण है कि खेल प्रतिभा केवल महानगरों में पैदा नहीं होती। देश के दूरदराज के पहाड़ी इलाकों में भी ऐसे खिलाड़ी मौजूद हैं, जिन्हें अवसर और बेहतर प्रशिक्षण मिलने पर वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
चंबा की पगडंडियों पर शुरू हुआ सीमा का सफर जापान के ट्रैक तक पहुंचा और वहां उन्होंने भारत के लिए कांस्य पदक जीतकर इसे यादगार बना दिया।
उनकी उपलब्धि हिमाचल प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। सीमा ने दिखाया कि रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो, लगातार मेहनत और मजबूत इरादे खिलाड़ी को बड़े मंच तक पहुंचा सकते हैं।









