रात में नींद में बोलने की आदत: लक्षणों पर ध्यान दें, सावधान रहें

रात में नींद में बोलने की आदत: लक्षणों पर ध्यान दें, सावधान रहें

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क्या आपने कभी सोते हुए किसी को बड़बड़ाते या बोलते सुना है? नींद में बोलना, जिसे मेडिकल भाषा में Sleep Talking या Somniloquy कहा जाता है, एक आम लेकिन अक्सर अनजानी स्थिति है। यह आमतौर पर नुकसानदायक नहीं होता, लेकिन लगातार इसके साथ अन्य लक्षण दिखें तो सावधानी जरूरी है।

नींद में बोलने के पीछे दिमाग की गतिविधि

नींद के दौरान हमारा दिमाग पूरी तरह शट डाउन नहीं होता, बल्कि विभिन्न चरणों से गुजरता रहता है। कभी-कभी नींद और जागने के बीच के सफर में बोलना शुरू हो जाता है। यह पैरासोम्निया की एक सामान्य अभिव्यक्ति है, जिसमें नींद में असामान्य व्यवहार होते हैं। इसमें हल्की फुसफुसाहट से लेकर साफ वाक्यों तक कुछ भी शामिल हो सकता है।

एनसीबीआई के 2019 के रिव्यू के अनुसार, नींद में बात करने और सपनों के बीच संबंध को पूरी तरह समझा नहीं गया है। इसलिए हर बार जब कोई नींद में बोले तो इसे बीमारी या चिंता का संकेत नहीं माना जा सकता।

क्या सपने और नींद में बोलना जुड़े हैं?

बहुत से लोगों को लगता है कि नींद में बोलने वाले व्यक्ति सपने देख रहे होते हैं। हालांकि, यह जरूरी नहीं है। सपने REM (Rapid Eye Movement) नींद के दौरान अधिक होते हैं, लेकिन नींद में बोलना Non-REM में भी संभव है। इसका मतलब सपने याद न आने पर भी बड़बड़ाना हो सकता है।

स्लीप टॉकिंग की आवाज़ें और शब्द हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। नींद में कही गई बातों को व्यक्ति के छिपे विचारों या मनोभावों का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

तनाव और चिंता का भी नींद में बोलने पर असर पड़ता है। दिनभर की चिंता, काम का दबाव और पारिवारिक तनाव नींद की गुणवत्ता घटा देते हैं। इससे नींद टूटती है, बेचैनी बढ़ती है और स्लीप टॉकिंग का सिलसिला शुरू हो सकता है।

स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, स्ट्रेस और एंग्जायटी नींद में बोलने के ट्रिगर हो सकते हैं, लेकिन हर किसी पर इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होता। केवल इस लक्षण से कोई स्लीप डिसऑर्डर तय नहीं किया जा सकता।

कब लें डॉक्टर से सलाह?

क्लीवलैंड क्लीनिक बताती है कि अगर नींद में बोले जाने की आदत अचानक शुरू हो, जोर-जोर से चिल्लाने, हिंसक हरकतें करने, बार-बार नींद टूटने या दिन में अत्यधिक नींद आने जैसे लक्षण होने लगे तो डॉक्टर से मिलना जरूरी है। सांस लेने में दिक्कत या तेज खर्राटे जैसी समस्याएं भी सतर्कता मांगती हैं।

नींद में बड़बड़ाना कुछ लोगों के लिए सामान्य बात हो सकती है, लेकिन अगर यह बार-बार हो और नींद पर असर डाले तो चिकित्सकीय जांच आवश्यक है। अच्छी नींद के लिए नियमित नींद का समय और साफ-सुथरी नींद की आदतें अपनानी चाहिए।

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KPN News
Author: KPN News

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