चक्रवात अर्नब की वजह से ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। आंध्र प्रदेश के साथ ही ओडिशा में भी तेज बारिश हो रही है। 28 अक्टूबर से ओडिशा के पश्चिमी और उत्तरी इलाकों में अचानक बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड की आशंका जताई जा रही है।
ओडिशा में फ्लैश फ्लड का खतरा क्यों बढ़ा?
ओडिशा के आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि छत्तीसगढ़ और झारखंड के नदियों के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में तेज बारिश हो रही है। इन नदियों का पानी ओडिशा के निचले इलाकों में पहुंचता है। इससे नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, जिससे अचानक बाढ़ आ सकती है। नदी किनारे बसे गांव, खेत और सड़कें बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं।
बारिश पहले से हो रही क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। यह खतरा खासकर ओडिशा के पश्चिमी और उत्तरी जिलों में ज्यादा बना हुआ है, जहां नदियों का जलस्तर बढ़ने का अधिक जोखिम है।
ओडिशा के किन जिलों में सबसे ज्यादा खतरा?
मौसम विभाग ने ओडिशा के पुरी, गजपति, गंजाम, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरि जिलों में 12 से 20 सेंटीमीटर तक भारी बारिश होने का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा बालासोर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रपाड़ा, कटक और खुर्दा सहित 16 जिलों के लिए येलो अलर्ट दिया गया है। इन जिलों में 7 से 11 सेंटीमीटर तक बारिश हो सकती है।
भारी बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ा है। संवेदनशील इलाकों में प्रशासन ने लोगों की आवाजाही पर पाबंदी लगाई है।
सरकार और प्रशासन की तैयारियां
ओडिशा सरकार निचले और जोखिम वाले इलाकों से करीब 48 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना बना रही है। गजपति और नबरंगपुर जिलों से लगभग 11-11 हजार लोगों की निकासी का लक्ष्य रखा गया है। मलकानगिरि, गंजाम, कोरापुट, रायगड़ा, कालाहांडी और नुआपाड़ा में भी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का काम चल रहा है।
राज्य में कुल 135 स्थायी और लगभग 1600 अस्थायी आश्रय स्थल तैयार किए गए हैं। राहत एवं बचाव के लिए 294 टीमें तैनात हैं, जिनमें नौ राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), 60 राज्य आपदा मोचन बल और 225 अग्निशमन विभाग की टीमें शामिल हैं।
झारखंड और छत्तीसगढ़ में क्या स्थिति है?
चक्रवात अर्नब के प्रभाव से झारखंड के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। रांची में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ में बस्तर, सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जिलों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
मौसम विभाग ने बताया है कि 28 अक्टूबर को ओडिशा, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में मध्यम स्तर की अचानक बाढ़ का खतरा है। प्रशासन नदियों के जलस्तर और बारिश पर नजर बनाए हुए है।
यह स्थिति इस बात को दर्शाती है कि चक्रवात अर्नब ने सिर्फ एक राज्य ही नहीं, बल्कि आसपास के राज्यों को भी बाढ़ और भारी बारिश जैसी विपत्तियों के लिए सतर्क रहने को मजबूर कर दिया है। प्रशासन ने व्यापक तैयारी कर रखी है ताकि प्रभावित क्षेत्रीय लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।
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