इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने धर्मांतरण मामले में मौलाना कलीम सिद्दीकी और उमर गौतम समेत आठ लोगों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। यह फैसला गुरुवार को सुनाया गया। इन सभी को एक कथित अवैध धर्मांतरण रैकेट में दोषी माना गया था। वहीं, आठ अन्य दोषियों को जमानत भी दी गई है, जो अपीलों के निर्णय तक प्रभावी रहेगी।
जमानत याचिकाओं का निर्णय
जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्र की खंडपीठ ने कुल 16 आपराधिक अपीलों से जुड़ी जमानत याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने माना कि मौलाना कलीम सिद्दीकी, मोहम्मद उमर गौतम और छह अन्य दोषियों के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर हैं। इसलिए, इस चरण में उनकी जमानत नहीं दी गई। वहीं, बाकी आठ दोषियों की भूमिका कम गंभीर होने के कारण उन्हें राहत प्रदान की गई।
जमानत पाने वाले दोषियों की सूची
जमानत मिलने वाले आठ दोषियों में मन्नू यादव, अब्दुल्ला उमर, धीरज गोविंदराव जगताप, सरफराज अली जाफरी और राहुल भोला शामिल हैं। कोर्ट ने इन्हें निर्देश दिया है कि ट्रायल कोर्ट द्वारा लगाए गए जुर्माने का 50 प्रतिशत दो महीनों में जमा किया जाए। नि:शर्त जुर्माने की राशि जमा नहीं होने पर इनके खिलाफ जमानत रद्द की जाएगी और इन्हें जेल भेजा जाएगा।
सुनवाई की अगली तिथि तय
हाई कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि इस मामले से जुड़े सभी आपराधिक अपीलों की सुनवाई जनवरी 2027 के पहले सप्ताह में की जाए। इससे संबंधित फैसलों का इंतजार रहेगा। कोर्ट के इन आदेशों के बाद इस आपराधिक मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
11 सितंबर 2025 को उत्तर प्रदेश की एक विशेष एनआईए-एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) कोर्ट ने इस अवैध धर्मांतरण रैकेट के मामले में 12 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसमें इस्लामिक उपदेशक मौलाना कलीम सिद्दीकी और इस्लामिक दावा सेंटर के संस्थापक मोहम्मद उमर गौतम भी शामिल थे।
विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने चार अन्य आरोपियों को 10 साल की जेल की सजा भी दी थी। यह सजा उक्त संगठित रैकेट में शामिल सभी आरोपितों के लिए महत्वपूर्ण फैसला था।
मामले की सुनवाई और दोषियों को मिली सजाओं की वजह से यह मुद्दा कानून और समाज में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। जिस कारण से हाई कोर्ट के फैसले का ध्यान रखा जा रहा है।
कोर्ट के आदेश के अनुसार, जिन दोषियों को जमानत मिल गई है वे निर्धारित शर्तें पूरी करते हुए न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करेंगे, जबकि अन्य दोषी जेल की सजा भुगतेंगे। अदालत ने अपने आदेश में मामले के सभी पक्षों के दावों को गंभीरता से परखा है।








