USCIS ने ग्रीन कार्ड आवेदकों के टैक्स रिकॉर्ड पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। अब अगर किसी ने टैक्स नहीं भरा या रिटर्न फाइल करने में देरी की तो उनका ग्रीन कार्ड आवेदन ठुकराया जा सकता है। यह बदलाव मई 2026 में USCIS द्वारा जारी किए गए मेमोरेंडम के बाद लागू हुआ है, जिसका मकसद आवेदकों की अतिरिक्त जांच करना है।
एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस (AOS) और उसका महत्व
AOS प्रक्रिया के अंतर्गत अमेरिका में रह रहे विदेशी नागरिक बिना देश छोड़े ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। भारतीय आवेदकों के लिए यह प्रक्रिया खास रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि उनका वेटिंग टाइम लंबा होता है। AOS के तहत देश में काम करना आसान हो जाता है, लेकिन नया नियम यह कहता है कि अब टैक्स भुगतान समेत पूरी पृष्ठभूमि भी जांची जाएगी।
USCIS के कड़े नियम और उनका असर
USCIS की नई नीति यह सुनिश्चित करती है कि ग्रीन कार्ड आवेदन के फैसले से पहले आवेदक का टैक्स रिकॉर्ड पूरी तरह जांचा जाए। इसके तहत न केवल सामान्य योग्यता, बल्कि टैक्स लेकर पेंडिंग स्थिति वाले आवेदकों के आवेदन खारिज किए जा सकते हैं। यह नियम एंप्लॉयमेंट-बेस्ड और फैमिली स्पॉन्सरशिप दोनों तरह के ग्रीन कार्ड पर लागू होता है।
इमिग्रेशन वकीलों का कहना है कि यदि किसी ने फेडरल, स्टेट या लोकल टैक्स में देरी की है या अब तक भुगतान नहीं किया, तो उसे परेशानी हो सकती है। साथ ही, जिन लोगों ने टैक्स रिटर्न में देरी के लिए एक्सटेंशन लिया है या किस्तों में पेमेंट कर रहे हैं, उनका आवेदन भी खतरे में हो सकता है।
न्यूयॉर्क की इमिग्रेशन वकील कैरिन वोलमैन ने आवेदकों को सलाह दी है कि वे ग्रीन कार्ड आवेदन से पहले अपने टैक्स रिकॉर्ड को सही कर लें। उन्होंने बताया कि एजेंसियां उन आवेदनों को खारिज कर रही हैं जो पहले मंजूर हो चुके थे, खासकर जिनके टैक्स भुगतान में देरी या रिटर्न फाइलिंग नहीं हुई।
इस नीति के कारण USCIS का मानना है कि AOS विशेषाधिकार है, इसलिए आवेदक को कानून और नियमों का पूरी तरह पालन करना होगा। अब यह आवश्यक है कि टैक्स संबंधी किसी भी प्रश्न में पारदर्शिता रहे ताकि आवेदन प्रक्रिया में बाधा न आए।
नए नियम के खिलाफ कानूनी लड़ाई
मई 2026 के बाद लागू इस नीति को लेकर अमेरिका में कानूनी विवाद भी शुरू हो गया है। 5 अक्टूबर 2026 को मैसाचुसेट्स के जिला न्यायालय में एक समूह ने DHS और USCIS के खिलाफ याचिका दायर की है। उनका कहना है कि यह नीति प्रशासनिक प्रक्रिया कानून, इमिग्रेशन कानून और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। फिलहाल मामला अदालत में लंबित है और इस पर कोई रोक नहीं लगी है।
इस बदलाव से भारतीय वर्कर्स सहित कई विदेशी नागरिकों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया जटिल हुई है। विशेषज्ञों की सलाह है कि टैक्स नियमों का पालन समय रहते करें ताकि भर्ती और स्थायी आवास की प्रक्रिया सुरक्षित रहे।








